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    पंजाब की सियासत में सनातन का दांव, हिंदू वोट बैंक पर सभी दलों की नजर; भगवान शिव व प्रभु राम भी रणनीति का हिस्सा

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    पंजाब की राजनीति में अब किसानों और सिखों के साथ सनातन वोट बैंक पर भी ध्यान केंद्रित हो रहा है। आप, भाजपा और कांग्रेस तीनों ही 38% हिंदू मतदाताओं को सा ...और पढ़ें

    हिंदू वोट बैंक पर सभी दलों की नजर... फाइल फोटो

    हिंदू वोट बैंक पर सभी दलों की नजर... फाइल फोटो

    HighLights

    1. पंजाब की राजनीति में सनातन वोट बैंक का बढ़ता महत्व।

    2. आप सरकार धार्मिक आयोजनों से हिंदू मतदाताओं को लुभा रही।

    3. भाजपा और कांग्रेस भी हिंदू वोट बैंक पर केंद्रित हैं।

    दिनेश शर्मा, जालंधर। पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां किसानों व सिखों को ही साधने का प्रयास किया जाता था वहीं, अब इसमें सनातन की भी एंट्री हो गई है।

    आप सरकार की ओर से हर जिले में 'एक शाम भगवान शिव के नाम' भजन संध्या और 'हे राम' नाटक का मंचन करवाना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा में हरिद्वार, मथुरा, वृंदावन और खाटू श्याम की यात्रा को शामिल किया जाना इसके ताजा उदाहरण हैं।

    विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में आ रह इन बदलावों की कड़ियों को जोड़ा जाए तो इस बार पंजाब के 38 प्रतिशत हिंदू वोट बैंक पर सबकी नजर है। पहले हिंदुओं को भाजपा का वोट बैंक समझा जाता था लेकिन अब इस वोट बैंक पर आप की भी नजर है।

    सचखंड डेरा बल्लां में प्रधानमंत्री का आना...

    इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि भाजपा राज्य में सत्ता में आने के लिए हिंदुओं के अलावा अनुसूचित जाति और जट्ट सिख वोट बैंक को साधने में लगी है। पार्टी ने जट्ट सिख को प्रदेश प्रधान बनाया है।

    इसी तरह, जालंधर स्थित सचखंड डेरा बल्लां में प्रधानमंत्री का आना, अमृतसर से वाराणसी के बीच संत रविदास एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी देना, इस बात के संकेत हैं कि भाजपा अनुसूचित जाति के सहारे सत्ता में आने की राह देख रही है। पहले पंजाब की राजनीति सिखों व और किसान मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

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    राजनीतिक दलों का फोकस गुरु साहिबानों के प्रकाश पर्व, शहीदी दिवस, बड़े धार्मिक समारोह और गुरुघरों से जुड़े आयोजनों पर रहा है। इसके अलावा किसानों के मुद्दे उठाकर उन्हें भी साधने का प्रयास किया जाता रहा है। इस बार पंजाब में इसके साथ-साथ सनातन कार्ड भी खेला जा रहा है। पंजाब में भाजपा व कांग्रेस में बंटा रहा हिंदू मतदाता, आप ने बदला समीकरण पंजाब में 38 प्रतिशत हिंदू वोट बैंक है।

    हिंदू मतदाता कभी पूरी तरह भाजपा के साथ नहीं

    यहां हिंदू मतदाता कभी पूरी तरह भाजपा के साथ नहीं रहा। कांग्रेस को भी लंबे समय तक हिंदू मतदाताओं का समर्थन मिलता रहा है। शिअद से अलग होने के बाद 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 9.6 था जोकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 प्रतिशत हो गया।

    वहीं, कांग्रेस का 2022 में मत प्रतिशत करीब 23 था जो 2024 में बढ़कर करीब 26 प्रतिशत हो गया। वहीं, आप को 2022 में 42 प्रतिशत मत मिले थे लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कम होकर 26 प्रतिशत रह गया। आप हिंदू वोट की रणनीति से अपने नुकसान की भरपाई कर दोबारा सत्ता का रास्ता देख रही है।

    शिव के नाम भजन संध्या का आयोजन

    वहीं, भाजपा और कांग्रेस भी अपने वोट हिंदू वोट बैंक को बनाए रखने का प्रयास कर रही है। हिंदू वोट बैंक वाले क्षेत्रों पर आप की विशेष नजर आप सरकार की नजर हिंदू वोट बैंक पर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 'एक शाम भगवान शिव के नाम 'भजन संध्या का आयोजन हिंदू बहुल क्षेत्रों में किया गया।

    इनमें जालंधर,अमृतसर, बटाला, गुरदासपुर, पठानकोट, पठानकोट, मुकेरियां, तलवाड़ा, पटियाला, मोहाली और रूपनगर शामिल हैं। इसी तरह अब ' हे राम' नाटकों का मंचन भी इन्हीं हिंदू बहुल क्षेत्रों में करवाया जा रहा है।