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रास्ते में थम रही सांसें, क्या पंजाब में आम मरीज के लिए नहीं बनीं वेंटिलेटर वाली ALS एंबुलेंस? लुधियाना हादसे से मचा हड़कंप

Published: Tue, 01 Sep 2026 12:54 PM (IST)

पंजाब में गंभीर मरीजों के लिए एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस की भारी कमी है, जबकि उपलब्ध एंबुलेंस वीआईपी ड्यूटी या स्टाफ/दस्तावेजों की कमी के कारण अनुपलब्ध रहती हैं।

क्या पंजाब में आम मरीज के लिए नहीं बनीं वेंटिलेटर वाली ALS एंबुलेंस (फाइल फोटो)

क्या पंजाब में आम मरीज के लिए नहीं बनीं वेंटिलेटर वाली ALS एंबुलेंस (फाइल फोटो)

जगदीश कुमार, जालंधर। गंभीर मरीज के लिए एंबुलेंस सिर्फ अस्पताल तक पहुंचाने का साधन नहीं, बल्कि रास्ते में उसकी सांस और धड़कन बचाए रखने वाली जीवनरेखा होती है। पंजाब में यह जीवनरेखा व्यवस्था की खामियों में उलझी हुई है।

लुधियाना में 20 वर्षीय खुशी की हालत गंभीर होने पर उसे पटियाला रेफर किया गया। उसकी स्थिति को देखते हुए उसे एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस की जरूरत थी, लेकिन उसे बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एंबुलेंस से भेजा गया।

रास्ते में आक्सीजन की कमी हुई और उसकी मौत हो गई। इस घटना ने गंभीर मरीजों को रेफर करने की सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इस घटना के बाद दैनिक जागरण ने गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध एएलएस एंबुलेंस की जमीनी स्थिति जाने के लिए कई जिलों में पड़ताल करवाई।

सामने आया कि कई जगह एएलएस एंबुलेंस होने के बावजूद मरीजों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। कहीं ड्राइवर नहीं हैं, कहीं दस्तावेज पूरे नहीं हैं और कहीं एंबुलेंस को वीआईपी मूवमेंट के लिए रिजर्व रखा जाता है।

बता दें कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नियमानुसार पांच लाख की आबादी पर एक एडवांस्ड एंबुलेंस होनी चाहिए। इसके बावजूद बड़े जिलों में भी एएलएस एंबुलेंस की उपलब्धता जरूरत के मुकाबले बेहद कम है।

जालंधर: चार एंबुलेंस, पर मरीजों के लिए भरोसेमंद नहीं

जालंधर में चार एएलएस एंबुलेंस होने के बावजूद गंभीर मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। इनमें दो एंबुलेंस के लिए ड्राइवर उपलब्ध नहीं है। एक के दस्तावेज अधूरे बताए जा रहे हैं, जबकि बची एक एंबुलेंस वीआईपी ड्यूटी में लगाई जाती है।

ऐसे में जालंधर से गंभीर मरीजों को अमृतसर मेडिकल कालेज या पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किए जाने पर एएलएस एंबुलेंस की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन जाती है। सिविल सर्जन विभाग की ओर से दो और एंबुलेंस की मांग रखी गई है।

लुधियाना: हादसे के बाद बंद

लुधियाना में कोरोना काल में मिली एएलएस एंबुलेंस का इस्तेमाल पिछले साल तक गंभीर मरीजों को रेफर करने में किया जाता रहा। पिछले कुछ समय से इसके वीआईपी ड्यूटी में इस्तेमाल की बात सामने आई।

करीब दो माह पहले एंबुलेंस हादसाग्रस्त हो गई और अब तक इसे मरीजों की सेवा में दोबारा लगाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। एसएमएस डा. अखिल सरीन ने भी माना कि जिस समय मरीज को एएलएस एंबुलेंस की जरूरत थी, उस समय अस्पताल के पास यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

बीएलएस व एएलएस में अंतर

बीएलएस एंबुलेंस सामान्य मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, आक्सीजन और प्राथमिक उपचार देने के लिए होती है। इसमें स्ट्रेचर, आक्सीजन, बीपी मानिटर और पल्स आक्सीमीटर जैसी बुनियादी सुविधाएं होती हैं। इसके विपरीत एएलएस एंबुलेंस गंभीर मरीजों के लिए चलती-फिरती आईसीयू होती है।

इसमें वेंटिलेटर, ईसीजी मानिटर, इन्फ्यूजन पंप और सक्शन मशीन जैसी सुविधाएं होती हैं। साथ में प्रशिक्षित पैरामेडिक और आईसीयू प्रशिक्षित नर्स होती है। हार्ट अटैक, गंभीर दुर्घटना, कोमा या सांस की समस्या वाले मरीजों के लिए रास्ते में यह अंतर जीवन और मौत का फैसला कर सकता है।

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जालंधर के सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. नमिता गर्ग ने कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल सहित अन्य वीआईपी दौरे काफी होते हैं। इस दौरान हमें प्रोटोकाल के तहत तीन-तीन वीआईपी टीमें भी लगानी पड़ती हैं। उनमें एएलएस एंबुलेंस शामिल की जाती है। और भी एंबुलेंस की मांग की गई है।

अमृतसर: 25 लाख आबादी पर एक ही एएलएस

करीब 25 लाख आबादी वाले अमृतसर जिले में सरकारी अस्पतालों के स्तर पर अलग एएलएस एंबुलेंस नहीं है। वर्तमान में 108 सेवा के माध्यम से एक एएलएस एंबुलेंस संचालित हो रही है। यदि यह एक गंभीर मरीज को दूसरे अस्पताल लेकर जा रही हो तो उसी समय दूसरे मरीज के लिए एएलएस उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है।

बठिंडा में सरकारी स्तर पर गंभीर मरीजों के लिए एएलएस एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है। डायल-108 सेवा से जुड़ी कंपनी के पास एक एएलएस एंबुलेंस है, लेकिन इसका इस्तेमाल वीआईपी काफिले के साथ किया जाता है। सड़क सुरक्षा फोर्स के पास भी एएलएस एंबुलेंस नहीं है। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जाती है।

कपूरथला: एएलएस आम मरीजों के लिए नहीं

कपूरथला में सिविल अस्पताल के पास एक एएलएस एंबुलेंस है, लेकिन यह गंभीर मरीजों की नियमित सेवा के बजाय वीआईपी ड्यूटी के लिए रखी गई है। एसएमओ परमिंदर कौर के अनुसार वीआईपी के शहर में आने पर एंबुलेंस प्रोटोकाल के तहत उनके साथ रहती है। आम नागरिकों के लिए बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध है।