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    बटाला में सब्सिडी वाली यूरिया से बन रही थी कैटल फीड, प्लांट अधिकारियों समेत दो फर्मों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 04:51 PM (IST)

    कृषि विभाग की जांच में कैटल फीड प्लांट में किसानों की सब्सिडी वाली यूरिया के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया। 1740 कट्टे जब्त किए गए और प्लांट अधिकार ...और पढ़ें

    प्लांट में जांच करते हुए पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी

     प्लांट में जांच करते हुए पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी

    HighLights

    1. बटाला में सब्सिडी वाली यूरिया का दुरुपयोग उजागर हुआ।

    2. कैटल फीड प्लांट में औद्योगिक उपयोग के लिए इस्तेमाल।

    3. पुलिस ने प्लांट अधिकारियों, फर्मों पर मामला दर्ज किया।

    जागरण संवाददाता, बटाला। पंजाब के गुरदासपुर में बटाला के किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली नीम-लेपित यूरिया खाद के कथित दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच के बाद पुलिस ने सहकारी कैटल फीड प्लांट घनिए के बांगर के अधिकारियों तथा यूरिया खाद की आपूर्ति करने वाली दो फर्मों और उनके मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    आरोप है कि किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाली यूरिया को औद्योगिक उपयोग वाली यूरिया की जगह कैटल फीड तैयार करने में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और निजी लाभ कमाने की साजिश रची गई। 

    कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक अमृतपाल सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 22 मई को किसान संगठनों की ओर से शिकायत मिली थी कि घनिए के बांगर स्थित सहकारी कैटल फीड प्लांट में तकनीकी उपयोग वाली महंगी यूरिया के बजाय किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी वाली नीम-लेपित यूरिया का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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    शिकायत के बाद हरकत में आाया विभाग

    शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग की टीम ने प्लांट में छापा मारा। जांच के दौरान टीम को वहां किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाली यूरिया के खाली कट्टे मिले। मौके से कुल 1740 कट्टे जब्त किए गए। अधिकारियों ने यूरिया के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला भेजा।

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    प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यूरिया में नीम तेल की कोटिंग की पुष्टि हुई। कृषि विभाग के अनुसार नीम-लेपित यूरिया केवल कृषि उपयोग के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाती है। इस पर नीम की कोटिंग इसलिए की जाती है ताकि खेतों में नाइट्रोजन का बेहतर उपयोग हो और खाद का दुरुपयोग रोका जा सके। दूसरी ओर औद्योगिक उपयोग वाली यूरिया बिना इस प्रकार की कोटिंग के होती है और उसकी कीमत भी काफी अधिक होती है।

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    दो फर्मों की कथित मिलीभगत सामने आई

    जांच में आरोप लगाया गया कि प्लांट के अधिकारियों और यूरिया की आपूर्ति करने वाली दो फर्मों की कथित मिलीभगत से सब्सिडी वाली यूरिया को औद्योगिक यूरिया के कट्टों में भरकर इस्तेमाल किया गया। शिकायत के अनुसार इस तरीके से सरकारी सब्सिडी का दुरुपयोग करते हुए आर्थिक लाभ कमाने का प्रयास किया गया।

    थाना घनिए के बांगर के प्रभारी इंस्पेक्टर लखविंदर सिंह ने बताया कि पुलिस ने सहकारी कैटल फीड प्लांट, उसके संबंधित अधिकारियों तथा यूरिया सप्लाई करने वाली दोनों फर्मों और उनके मालिकों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच, संबंधित अधिकारियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई कर रही है।

    सब्सिडी वाली व औद्योगिक यूरिया में जाने अंतर

    कृषि विभाग के अनुसार किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली नीम-लेपित यूरिया का मूल्य लगभग 266 रुपये 50 पैसे प्रति कट्टा होता है और प्रत्येक कट्टे में 45 किलोग्राम यूरिया रहती है। इसके कट्टे का रंग पीला होता है। वहीं औद्योगिक उपयोग वाली यूरिया की कीमत लगभग 3032 रुपये प्रति कट्टा होती है, प्रत्येक कट्टे में 50 किलोग्राम यूरिया रहती है और इसके कट्टे सफेद रंग के होते हैं। इसी अंतर के आधार पर जांच एजेंसियों ने पूरे मामले की पड़ताल शुरू की है।

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