क्या सुरक्षित हैं लोगों के अहम दस्तावेज? जीरकपुर नगर परिषद का 23 वर्ष का रिकॉर्ड बोरों में कैद, मंडरा रहा खतरा
जीरकपुर नगर परिषद के 2002 से 2019 तक के महत्वपूर्ण दस्तावेज बेसमेंट में बोरों में बंद हैं, जो नमी और सीवरेज के पानी से खराब होने के खतरे में हैं। शहरव ...और पढ़ें

नमी और सीवरेज के पानी से खराब होने का खतरा बना हुआ है।
HighLights
2002-2019 के रिकॉर्ड बेसमेंट में असुरक्षित पड़े हैं।
नमी और सीवरेज से दस्तावेजों को नुकसान का खतरा।
नागरिकों ने रिकॉर्ड के तत्काल डिजिटलीकरण की मांग की।
मेजर अली, जीरकपुर (मोहाली)। जीरकपुर नगर परिषद के गठन के बाद से शहर ने तेजी से विकास किया है, लेकिन इसके सरकारी दस्तावेज आज खुद संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
2002 से 2019 तक के महत्वपूर्ण रिकाॅर्ड जैसे प्राॅपर्टी, नक्शे, टैक्स और भवन निर्माण अनुमतियां, नगर परिषद की बेसमेंट में बोरों में बंद हैं। इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण न होने के कारण नमी और सीवरेज के पानी से खराब होने का खतरा बना हुआ है।
नगर परिषद का पहला कार्यालय डिफेंस कॉलोनी में था, जहां शुरुआती वर्षों में सभी रिकाॅर्ड रखे गए थे। 2015 में नई इमारत बनने के बाद, पुराने दस्तावेजों को नई बिल्डिंग की बेसमेंट में स्थानांतरित किया गया।
हालांकि, 11 साल बीतने के बावजूद इन दस्तावेजों का आधुनिक तरीके से संरक्षण नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेसमेंट में नमी और सीवरेज का पानी दस्तावेजों के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

लगातार नमी के संपर्क में रहने से कागज गलने और लिखावट खराब होने की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता रोजी सैनी ने कहा, ये फाइलें जीरकपुर के विकास का इतिहास हैं। इन्हें सुरक्षित रिकार्ड रूम में रखकर डिजिटल किया जाना चाहिए।
पुराने रिकाॅर्ड की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इनमें केवल सामान्य पत्राचार नहीं, बल्कि प्राॅपर्टी रिकाॅर्ड, नक्शे और टैक्स वसूली से संबंधित दस्तावेज भी शामिल हैं। यदि इन दस्तावेजों का नुकसान होता है, तो कानूनी विवादों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
प्रापर्टी कारोबारी मलकीत सिंह ने कहा, यदि रिकाॅर्ड खराब हो गया तो आम लोगों को भी नुकसान होगा। इसे डिजिटल करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।
नगर परिषद ने 2019 के बाद के रिकार्ड को ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन 2002 से 2019 के बीच के रिकाॅर्ड अभी भी कागजी दस्तावेजों पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि परिषद को पहले पुराने रिकाॅर्ड का सर्वे करवाना चाहिए और फिर उन्हें डिजिटल बैकअप तैयार करना चाहिए।
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आग और पानी से सुरक्षा के लिए विशेष इंतजामों की आवश्यकता है। वरिष्ठ नागरिक मुकेश कुमार ने कहा, पुराने सरकारी दस्तावेज एक बार खराब हो गए तो उनकी भरपाई संभव नहीं होगी। परिषद को दुर्घटना होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
शहरवासियों ने नगर परिषद से 2002 से 2019 तक के रिकार्ड के संरक्षण के लिए विशेष अभियान शुरू करने की मांग की है। कार्यकारी अधिकारी परविंदर सिंह भट्टी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। जीरकपुर के पुराने रिकाॅर्ड का संरक्षण न केवल दस्तावेजों के लिए आवश्यक है, बल्कि यह भविष्य में लोगों के लिए भी सहायक होगा।