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पंजाब में किरायेदार दुकानदारों को मिलेगा मालिकाना हक, 'मेरी दुकान मेरे नाम' योजना शुरू

Published: Thu, 08 Oct 2026 03:50 PM (IST)

पंजाब सरकार ने 'मेरी दुकान, मेरे नाम' योजना शुरू की है, जिसके तहत नगर निकायों की दुकानों पर लंबे समय ...और पढ़ें

पंजाब में किरायेदार दुकानदारों को मिलेगा मालिकाना हक। एआई जेनरेटेड तस्वीर।

पंजाब में किरायेदार दुकानदारों को मिलेगा मालिकाना हक। एआई जेनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. पंजाब सरकार ने 'मेरी दुकान, मेरे नाम' योजना की शुरुआत की

  2. 12 साल से काबिज दुकानदारों को मालिकाना हक, आवेदन शुरू

  3. आय व क्षेत्रफल अनुसार कलेक्टर रेट पर मिलेगी बड़ी छूट

रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों की दुकानों पर लंबे समय से किराये पर कारोबार कर रहे दुकानदारों को जमीन का मालिकाना हक देने के लिए ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’ योजना शुरू की है।

कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत एक अप्रैल 2020 से पहले से कम से कम 12 साल से कानूनी रूप से दुकान पर काबिज या वैध किरायेदार दुकानदार मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकेंगे।

बैंस ने बताया कि लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों की दुकानों पर कारोबार कर रहे दुकानदारों की यह मांग रही है कि उन्हें दुकानों का मालिकाना हक दिया जाए। इसी मांग को पूरा करने के लिए सरकार यह योजना लेकर आई है। पात्र दुकानदार आज से एसडीएम कार्यालय, नगर परिषद कार्यालय या नगर निगम कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

आवेदन के बाद एसडीएम स्तर पर कमेटी दुकानदार की पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। इसके बाद कीमत तय करने के लिए एसडीएम स्तर की प्राइस फिक्सेशन कमेटी और डीसी स्तर की प्राइस फिक्सेशन कमेटी प्रक्रिया पूरी करेगी।

अंतिम प्रक्रिया संबंधित स्थानीय निकाय के सदन के माध्यम से पूरी होगी। नगर निगम की दुकान का मामला निगम सदन, नगर परिषद की दुकान का मामला परिषद और नगर पंचायत की दुकान का मामला नगर पंचायत के सदन में रखा जाएगा।

आय वर्ग के अनुसार मिलेगी छूट

योजना में दुकानदारों को कलेक्टर रेट पर आय के अनुसार बड़ी रियायत दी गई है। तीन लाख रुपये तक की आय वाले ईडब्ल्यूएस वर्ग के दुकानदारों को कलेक्टर रेट का केवल 12.5 प्रतिशत देना होगा। तीन लाख से अधिक और आठ लाख रुपये तक की आय वाले एलआईजी वर्ग के दुकानदारों के लिए यह दर 25 प्रतिशत होगी।

आठ लाख से 13 लाख रुपये तक की आय वाले मिडिल इनकम ग्रुप के दुकानदारों को कलेक्टर रेट का 50 प्रतिशत देना होगा, जबकि इससे अधिक आय वालों को 100 प्रतिशत कलेक्टर रेट देना होगा। इसके अलावा 50 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों के लिए भी रियायती दर का प्रावधान किया गया है। ऐसी दुकानों के लिए कलेक्टर रेट का 50 प्रतिशत भुगतान करना होगा।

मंत्री ने बताया कि योजना का लाभ केवल कानूनी रूप से काबिज दुकानदारों को मिलेगा। पार्क, गली या अन्य सार्वजनिक जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को योजना में शामिल नहीं किया गया है। योजना में किसी प्रकार की सब्सिडी का भी प्रावधान नहीं है। दुकानदार अपनी कानूनी कब्जेदारी या किरायेदारी साबित करने के लिए जीएसटी प्रमाणपत्र, बिल, फर्म पंजीकरण समेत अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे।