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    भाजपा में शामिल राज्यसभा सांसद की याचिका पर हाई कोर्ट सख्त, पूछा- एफआईआर है तो छिपा क्यों रही सरकार?

    Updated: Fri, 08 May 2026 04:56 PM (IST)

    भाजपा में शामिल हुए पंजाब के राज्यसभा सांसद की याचिका पर हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि यदि एफआईआर दर्ज है तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। ...और पढ़ें

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से FIR जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए।

    2. भाजपा में शामिल सांसद ने अपने खिलाफ दर्ज FIR की प्रति मांगी।

    3. अदालत ने पंजाब सरकार को अगली सुनवाई तक कार्रवाई रोकने का आदेश दिया।

    जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पंजाब के एक राज्यसभा सांसद की याचिका पर शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में तीखी सुनवाई हुई। अदालत ने पंजाब सरकार से सख्त सवाल करते हुए पूछा कि यदि सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही।

    अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य “छुपन-छुपाई” की नीति नहीं अपना सकता। मामले की सुनवाई के दौरान सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 24 अप्रैल को पार्टी बदलने के बाद 2 और 3 मई को कई समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित हुईं कि पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की हैं।

    हालांकि अब तक न तो एफआईआर नंबर बताए गए हैं, न संबंधित थाना और न ही धाराओं की जानकारी दी गई है। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत से कहा कि सांसद केवल इतना जानना चाहते हैं कि यदि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज है तो उसकी प्रति उपलब्ध करवाई जाए ताकि वह कानून के तहत अपना बचाव कर सकें।

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    डीजीपी कार्यालय से भी नहीं मिला स्पष्ट जवाब

    अदालत को यह भी बताया गया कि इस संबंध में पंजाब डीजीपी को लिखित प्रतिनिधित्व देकर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन वहां से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि कोई मामला दर्ज है तो उसकी जानकारी देना राज्य की जिम्मेदारी है।

    खबरें और भी

    याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से यह भी आग्रह किया गया कि जब तक सरकार स्पष्ट स्थिति नहीं बताती, तब तक उनके खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।

    दूसरी ओर पंजाब सरकार की ओर से पेश विशेष अधिवक्ता ने कहा कि याचिका केवल समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों और आशंकाओं पर आधारित है। उन्होंने अदालत को बताया कि फिलहाल उनके पास यह जानकारी नहीं है कि वास्तव में किसी जिले में एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं। इसके लिए विभिन्न जिलों से जानकारी एकत्र करनी होगी।

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    राज्य सरकार के रुख पर भी उठे सवाल

    सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि यदि एक सांसद अदालत में यह कह रहा है कि उसे मीडिया रिपोर्टों के आधार पर आशंका है, तो राज्य को कम से कम यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामला दर्ज है या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी पक्ष का यह कहना कि उन्हें जानकारी नहीं है, प्रथम दृष्टया असामान्य प्रतीत होता है।

    हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आशंका के आधार पर व्यापक सुरक्षा देना कानून के अनुसार संभव नहीं है। इसके बावजूद अदालत ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक बिना अदालत की अनुमति के कोई कार्रवाई न करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी। 

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