पंजाब में धान की सीधी बुवाई ने बनाया नया रिकॉर्ड, चार लाख एकड़ पार रकबा; किसानों को मिलेंगे 61 करोड़ रुपये
पंजाब में धान की सीधी बुवाई का रकबा बढ़कर 4 लाख एकड़ से अधिक हो गया है। 31,478 किसानों को करीब 61 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी, जिससे भूजल सं ...और पढ़ें

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HighLights
डीएसआर रकबा 4 लाख एकड़ पार, 36% की वृद्धि।
किसानों को 61 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।
भूजल संरक्षण में सहायक, 15-20% पानी की बचत।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में भूजल संरक्षण की दिशा में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक को किसानों का लगातार बढ़ता समर्थन मिल रहा है। खरीफ सीजन 2026 में राज्य में डीएसआर के तहत रकबा बढ़कर 4,00,433.26 एकड़ पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल यह रकबा करीब 2.94 लाख एकड़ था।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस बार 31,478 पंजीकृत किसानों ने धान की सीधी बुवाई अपनाई है। कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार डीएसआर अपनाने वाले किसानों को 1500 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दे रही है।
इस आधार पर किसानों को करीब 61 करोड़ रुपये वितरित किए जाने का अनुमान है। उन्होंने संबंधित जिला अधिकारियों को डीएसआर के तहत किए गए रकबे का तत्काल सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को बिना देरी प्रोत्साहन राशि मिल सके।
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प्रति एकड़ 15 से 20% तक पानी की बचत
खुड्डियां ने कहा कि इस वर्ष डीएसआर को अपनाने की रफ्तार पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक रही है। इससे स्पष्ट है कि किसान अब पारंपरिक धान रोपाई के बजाय इस तकनीक को टिकाऊ विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीएसआर पद्धति से प्रति एकड़ 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जिससे भूजल स्तर को बचाने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।
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राज्य में फाजिल्का सबसे आगे
जिलावार आंकड़ों के अनुसार फाजिल्का 1,55,422.77 एकड़ रकबे के साथ राज्य में पहले स्थान पर रहा। यहां 12,063 किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई। श्री मुक्तसर साहिब 1,06,038.81 एकड़ और 7,345 किसानों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिरोजपुर 38,088.59 एकड़ रकबे और 1,929 किसानों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बठिंडा और संगरूर भी शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में डीएसआर के दायरे को और बढ़ाने के लिए किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और हर स्तर पर सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रोत्साहन राशि देने की योजना नहीं, बल्कि पंजाब में भूजल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की स्थायी संस्कृति विकसित करने की पहल है।