पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू, मान सरकार पेश करेगी कई अहम बिल; विपक्ष ने भी कसी कमर
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू होकर 10 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को विनियमित करने वाले विधेयक और बेअदबी कानून ज ...और पढ़ें
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पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू (फाइल फोटो)
HighLights
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आज से 10 अगस्त तक।
निजी स्कूलों की फीस वृद्धि विनियमन विधेयक पर रहेगी नजर।
बेअदबी कानून, कानून व्यवस्था और भर्तियों पर भी चर्चा।
डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र आज, यानी कि सोमवार से शुरू हो रहा है। यह सत्र 10 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और जनहित से जुड़े विषय सदन के सामने रखेगी। साथ ही विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार पहले दिन सदन में पिछले सत्र के बाद दिवंगत हुए प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद नियमित कार्यवाही शुरू होगी। चार, पांच, सात और दस अगस्त को विधायी कार्य होंगे, जबकि छह अगस्त को गैर-सरकारी कार्य दिवस रहेगा। आठ और नौ अगस्त को अवकाश रहेगा।
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स्कूल फीस संशोधन विधेयक पर रहेगी नजर
इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण विधेयक पंजाब गैर सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान फीस विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 माना जा रहा है। सरकार इस विधेयक के माध्यम से निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को विनियमित करना चाहती है। सरकार पहले ही वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा पांच प्रतिशत तय करने का निर्णय ले चुकी है।
साथ ही यदि किसी स्कूल ने पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि अभिभावकों को लौटाने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से प्रदेश के 7800 से अधिक निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक विद्यार्थियों और उनके परिवारों को लाभ मिलेगा।
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बरनाला में हुई घटना पर भी हो सकती है चर्चा
सत्र के दौरान कानून व्यवस्था, सरकारी भर्तियों, कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों, बरनाला की हालिया घटना और बेअदबी कानून जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है। विभिन्न राजनीतिक दल इन मुद्दों पर अपने-अपने पक्ष सदन में रखेंगे।
बेअदबी कानून को लेकर भी चर्चा की संभावना है। इस विषय पर विभिन्न धार्मिक और सामाजिक पक्षों की ओर से सुझाव दिए गए हैं। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि कानून का उद्देश्य केवल बेअदबी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि उसका किसी भी धार्मिक परंपरा, सिख रहित मर्यादा या धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है।