Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बच्चों में टाइप-1 मधुमेह पर नई उम्मीद; प्रोबायोटिक्स से बेहतर हुआ शुगर कंट्रोल, इम्यून सिस्टम भी मजबूत

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 12:01 PM (GMT+05:30)

    पीजीआई चंडीगढ़ के एक अध्ययन में पाया गया है कि प्रोबायोटिक्स टाइप-1 मधुमेह से जूझ रहे बच्चों में शुगर नियंत्रण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर कर सकत ...और पढ़ें

    2 से 12 वर्ष की उम्र के उन बच्चों पर छह महीने तक चले परीक्षण में कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए।

    2 से 12 वर्ष की उम्र के उन बच्चों पर छह महीने तक चले परीक्षण में कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए।

    HighLights

    1. प्रोबायोटिक्स ने बच्चों में शुगर नियंत्रण में सुधार किया।

    2. इम्यून सिस्टम की विशेष कोशिकाओं में वृद्धि देखी गई।

    3. इंसुलिन की आवश्यकता कम हुई, सी-पेप्टाइड स्तर बेहतर।

    मोहित पांडेय, चंडीगढ़। डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के लिए राहत भरी खबर है। पीजीआई के एक अध्ययन में पाया गया है कि प्रोबायोटिक्स, यानी आंत के ‘अच्छे बैक्टीरिया’, बच्चों में शुगर कंट्रोल सुधारने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर हो सकते हैं।

    यह शोध इंडियन जर्नल आफ पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन को डाॅ. लोकेश एमएन, डाॅ. राकेश कुमार, डाॅ. नरेश सचदेवा, डाॅ. अनित रावत, डाॅ. जैविंदर यादव और डाॅ. देवी दयाल ने मिलकर किया।

    शोध में 2 से 12 वर्ष की उम्र के उन बच्चों को शामिल किया गया, जिन्हें पिछले छह महीनों में टाइप-1 मधुमेह का पता चला था।
    डाॅक्टरों ने बच्चों को दो समूहों में बांटा। एक समूह को रोजाना प्रोबायोटिक पाउडर (विवोमिक्स) दिया गया, जबकि दूसरे समूह को प्लेसीबो (समान दिखने वाला पाउडर) दिया गया।

    छह महीने तक चले इस परीक्षण में कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए। शोध के अनुसार, जिन बच्चों को प्रोबायोटिक दिया गया, उनमें इम्यून सिस्टम से जुड़े विशेष कोशिकाओं (टी-रेग्स) की संख्या में स्पष्ट वृद्धि देखी गई। साथ ही, उनका एचबीए1सी स्तर (ब्लड शुगर का संकेतक) 7.55 तक रहा, जबकि प्लेसीबो समूह में यह 8.35 पाया गया।

    इसका मतलब है कि प्रोबायोटिक लेने वाले बच्चों में शुगर बेहतर तरीके से नियंत्रित रही। इसके अलावा, प्रोबायोटिक समूह में इंसुलिन की जरूरत भी कम पाई गई और सी-पेप्टाइड स्तर बेहतर रहा, जो शरीर में इंसुलिन बनने की क्षमता को दर्शाता है।

    खबरें और भी

    हालांकि, हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर का अचानक कम होना) की घटनाओं में दोनों समूहों के बीच कोई खास अंतर नहीं पाया गया। डाक्टरों के अनुसार, आंत (गट) में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं।

    टाइप-1 मधुमेह में यह संतुलन बिगड़ जाता है, जिसे प्रोबायोटिक्स के जरिए सुधारा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध भविष्य में टाइप-1 मधुमेह के इलाज के नए रास्ते खोल सकता है। हालांकि, इसे बड़े स्तर पर और लंबे समय तक किए गए अध्ययनों से और प्रमाणित करने की जरूरत है।