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    PGI में टीका चोरों का जल्द खुलेगा राज, जांच के लिए कमेटी गठित; 20 लाख के इंजेक्शन चोरी होने का मामला

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:00 AM (IST)

    पीजीआई चंडीगढ़ में गायनी विभाग से 20 लाख रुपये के इंजेक्शन चोरी होने के मामले में अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक कमेटी गठित की है। यह कमेटी इंजेक्शनों क ...और पढ़ें

    पीजीआई के गायनी विभाग से चोरी हुए लाखों के टीके।

    पीजीआई के गायनी विभाग से चोरी हुए लाखों के टीके।

    HighLights

    1. ‘मांग और खपत’ प्रक्रिया की जांच जारी।

    2. आंतरिक जांच कमेटी का गठन किया।

    3. कमेटी एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट सौंपेगी।

    मोहित पांडेय, चंडीगढ़। पीजीआई के गायनी विभाग से 15 से 20 लाख रुपये के महंगे इंजेक्शन गायब होने के मामले में अब अस्पताल प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए इंटरनल कमेटी गठित कर दी है।

    जानकारी के अनुसार कमेटी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वह एक सप्ताह के भीतर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी ‘मांग और खपत’ प्रक्रिया की जांच कर रही है। यानी जरूरत से अधिक मात्रा में इंजेक्शनों के इंडेंट किस आधार पर जारी किए गए और स्टाक में दर्ज दवाएं आखिर किस प्रक्रिया के तहत वार्ड से बाहर हुईं।

    जानकारी के अनुसार कमेटी संबंधित वार्ड में इंजेक्शन की मांग और वास्तविक खपत का भी मिलान भी कर रही है। इसके अलावा इंजेक्शन के इंडेंट जारी होने से लेकर फार्मेसी से दवा मिलने, वार्ड में पहुंचने और मरीजों को इस्तेमाल किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया की गहनता से जांच की जा की जा रही है।

    इससे यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि स्टाक में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और कब से हो रही थी। मामले की प्राथमिक जांच में सामने आया था कि गायनी विभाग में सामान्य जरूरत की तुलना में चार-पांच गुना अधिक इंजेक्शन मंगाए जा रहे थे। इसी असामान्य खपत के बाद मामला प्रशासन की नजर में आया था।

    फार्मेसी की ओर से संबंधित वार्ड को अलर्ट किए जाने के बाद स्टाक की जांच शुरू की गई थी। अब इंटरनल कमेटी स्टाक रजिस्टर, इंडेंट, दवा की सप्लाई और मरीजों के उपचार संबंधी उपलब्ध रिकाॅर्ड की जांच कर रही है । इसके साथ ही विभाग में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है, जिसमें आरोपितों ने चोरी की बात स्वीकार की।

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    सीसीटीवी फुटेज भी जांच के दायरे में

    कमेटी संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। इसके साथ फुटेज और दस्तावेजों के मिलान से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रही है कि स्टाक से दवाएं कब और किस प्रक्रिया के तहत निकलीं।

    जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी और शिफ्ट का रिकाॅर्ड भी खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही कमेटी यह भी जांच करेगी कि लाखों रुपये के इंजेक्शनों का अतिरिक्त इंडेंट किस कर्मचारी या अधिकारी की मंजूरी से जारी हुआ था यह भी पता लगाए जा रहा है।

    इसके अलावा फार्मेसी से वार्ड तक दवा पहुंचने के बाद स्टाक का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और कम मात्रा होने के बावजूद इसकी रिपोर्ट क्यों नहीं हुई, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।