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    हर छह महीने में AI से स्कैन होंगे नेशनल हाईवे, सरकार ला रही नई तकनीक; तुरंत पकड़ में आएंगी सड़क की खराबियां

    Updated: Wed, 06 May 2026 02:22 PM (IST)

    सरकार ने नेशनल हाईवे की गुणवत्ता सुधारने के लिए AI आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत हर छह महीने सड़क की जांच होगी और खराबी ...और पढ़ें

    ये AI जनरेटेड इमेज है।

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    HighLights

    1. एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू

    2. हर छह महीने में होगी हाईवे की अनिवार्य जांच

    3. लेजर स्कैनिंग, आईआरआई रेटिंग से गुणवत्ता जांच

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब के नेशनल हाईवे नियमित जांच के दायरे में लाए जा रहे हैं। सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत हर छह महीने में हाईवे की अनिवार्य जांच की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य सड़कों की खराब होती स्थिति को समय रहते पकड़ना और मेंटेनेंस सिस्टम को अधिक जवाबदेह बनाना है।

    परियोजना के तहत 23 राज्यों में करीब 20 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवे नेटवर्क को कवर किया जाएगा। लेजर स्कैनिंग तकनीक के जरिए सड़कों की सतह की 10 सेंटीमीटर तक की सटीक मैपिंग की जाएगी। यह डेटा सीधे एनएचएआई के केंद्रीय प्लेटफॉर्म पर अपलोड होगा, जहां एआई के माध्यम से उसका विश्लेषण किया जाएगा।

    सिस्टम सड़क की स्थिति, दरारों और संभावित नुकसान का आकलन कर संबंधित एजेंसियों को तुरंत अलर्ट जारी करेगा। अधिकारियों का कहना है कि अब तक सड़कों की जांच मुख्य रूप से मैनुअल निरीक्षण पर निर्भर थी, जिससे कई बार समस्याएं देर से सामने आती थीं। नई तकनीक इस कमी को दूर करेगी और रियल-टाइम डेटा के आधार पर फैसले लिए जा सकेंगे। इससे निर्माण कंपनियों और मेंटेनेंस एजेंसियों की जवाबदेही भी तय होगी।

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    AI

    ये सूचनात्मक तौर पर AI जनरेटेड इमेज है।

    आईआरआई रेटिंग भी लागू होगी

    इस सिस्टम के साथ भारत में आईआरआई (इंटरनेशनल रफनेस इंडेक्स) रेटिंग भी लागू की जा रही है। इसके जरिए सड़कों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मापा जाएगा। यदि किसी हाईवे की रेटिंग तय स्तर से नीचे जाती है, तो संबंधित कंपनी को तुरंत मरम्मत करनी होगी, अन्यथा उस पर कार्रवाई हो सकती है।

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    करीब 4 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में अत्याधुनिक उपकरणों से लैस सर्वे वाहन तैनात किए जाएंगे। ये वाहन बिना ट्रैफिक रोके लगातार सड़कों की स्कैनिंग करेंगे और माइक्रो लेवल तक की खामियों को रिकॉर्ड करेंगे। इससे बड़ी खराबी आने से पहले ही मरम्मत संभव हो सकेगी।

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    पंजाब नॉर्थ जोन में शामिल

    देश को पांच जोन में बांटकर इस योजना को लागू किया जा रहा है। पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर को नॉर्थ जोन में शामिल किया गया है। पहले चरण में 10 हजार किलोमीटर सड़कों को कवर किया जा रहा है, जिसमें उत्तरी राज्यों का बड़ा हिस्सा शामिल है। कई जगहों पर सर्वे कार्य शुरू भी हो चुका है।
    विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पहल से सड़क हादसों में कमी आएगी और यात्रियों को बेहतर सफर मिलेगा। साथ ही, समय पर मरम्मत से सरकारी खर्च में भी कमी आएगी और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर की उम्र बढ़ेगी।

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