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'बिना मंजूरी कैसे दर्ज हुई FIR?', OSD राजबीर घुम्मन ने CBI कार्रवाई को हाई कोर्ट में दी चुनौती

Published: Thu, 08 Oct 2026 08:08 PM (IST)

पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर तैनात अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन ने अपने खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर ...और पढ़ें

घुम्मन ने सीबीआई की एफआईआर और घर पर तलाशी को हाई कोर्ट में दी चुनौती।

घुम्मन ने सीबीआई की एफआईआर और घर पर तलाशी को हाई कोर्ट में दी चुनौती।

HighLights

  1. राजबीर घुम्मन ने सीबीआई एफआईआर और तलाशी को हाई कोर्ट में चुनौती दी

  2. भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई

  3. याचिका में एफआईआर रद्द करने और कार्रवाई रोकने की मांग

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर तैनात अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन ने अपने खिलाफ सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर और इसके बाद की गई तलाशी कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

घुम्मन ने याचिका में दावा किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पंजाब सरकार से अनिवार्य पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई।

उनका कहना है कि जिस मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की, वह उनके सरकारी कार्यों और अधिकारियों के स्थानांतरण व तैनाती से जुड़े कथित निर्णयों से संबंधित है। ऐसे में धारा 17ए की सुरक्षा लागू होती है।

याचिका के अनुसार घुम्मन को पंजाब सरकार ने 31 मार्च 2022 के आदेश के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी अधिकारी नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता ने बताया है कि 31 अक्टूबर 2025 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंजाब के निदेशक को एक शिकायत दी गई थी। इसके बाद मामले में जांच और आगे की कार्रवाई का घटनाक्रम शुरू हुआ।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसी दिन दर्ज हुई एफआईआर

याचिका में कहा गया है कि पांच अक्टूबर 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने एक अलग याचिका में सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।

घुम्मन का कहना है कि इसी आदेश के दिन सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा-द्वितीय, नई दिल्ली ने एफआईआर दर्ज की। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी लगाई गई हैं।

घुम्मन के मुताबिक एफआईआर दर्ज होने के अगले दिन छह अक्टूबर को सीबीआई के सहायक पुलिस अधीक्षक ने चंडीगढ़ स्थित विशेष अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 96 के तहत तलाशी वारंट हासिल किया।

इसके बाद पंजाब के संगरूर जिले में स्थित उनके पैतृक गांव घराचों स्थित आवास पर तलाशी ली गई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति में देर रात तक कार्रवाई चली।

धारा 17ए को बताया जांच से पहले अनिवार्य शर्त

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी अधिकारी के आधिकारिक फैसलों या सिफारिशों से संबंधित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से पहले धारा 17ए के तहत सक्षम सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि पंजाब सरकार ने 2021 में संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया अपनाई थी, जिसके तहत ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी को एफआईआर दर्ज करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मंजूरी लेनी होती है। याचिका में घुम्मन ने सीबीआई की एफआईआर रद करने, तलाशी वारंट और तलाशी कार्रवाई को अवैध घोषित करने तथा आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

साथ ही पंजाब सरकार से यह रिकॉर्ड पेश करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ धारा 17ए के तहत कभी कोई पूर्व स्वीकृति मांगी या दी गई थी अथवा नहीं। याचिका में यह भी कहा गया है कि संबंधित कार्रवाई से उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। गुरुवार को यह याचिका हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में फाइल की गई है जो सुनवाई के लिए जल्द ही सूचीबद्ध हो सकती है।