'मेरिट सूची में नाम होने से नौकरी का अधिकार नहीं...', पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पीएसपीसीएल लाइनमैन भर्ती विवाद में नियुक्ति की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिय ...और पढ़ें

मेरिट सूची में नाम होने मात्र से नौकरी का अधिकार नहीं: कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने लाइनमैन भर्ती याचिकाएं खारिज कीं
मेरिट सूची में नाम नियुक्ति का अधिकार नहीं
पीएसपीसीएल को नई भर्ती प्रक्रिया की राहत मिली
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। करीब डेढ़ दशक पुराने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की लाइनमैन भर्ती विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में शामिल होना या मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर लेना किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का वैधानिक अधिकार प्रदान नहीं करता। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने कई याचिकाओं पर संयुक्त निर्णय सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2011 में जारी विज्ञापन के तहत भर्ती को केवल 1000 पदों तक सीमित माना जाएगा और शेष पद भविष्य की रिक्तियां मानी जाएंगी।
अदालत ने सभी दावों को निराधार ठहराया। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जनवरी 2011 में लगभग 5000 लाइनमैन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे और उन्होंने चयन प्रक्रिया में सफलतापूर्वक भाग लिया था, लेकिन लंबित जनहित याचिका के कारण नियुक्तियां रोक दी गईं। बाद में बोर्ड आफ डायरेक्टर्स द्वारा शेष पदों की भर्ती रद कर दी गई, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए।
हालांकि, हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि पूर्व में दायर जनहित याचिका के दौरान अदालत ने केवल 1000 पद भरने की अनुमति दी थी। इसके बाद उत्पन्न होने वाली रिक्तियां नई भर्ती के माध्यम से ही भरी जानी थीं। अदालत ने माना कि भविष्य की रिक्तियों को पुराने विज्ञापन के आधार पर भरना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत अन्य पात्र उम्मीदवारों के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
हाई कोर्ट ने कहा कि आयु सीमा में दी गई छूट केवल उम्मीदवारों को आगामी भर्तियों में भाग लेने का अवसर देने के लिए थी, इसे नियुक्ति का अधिकार नहीं माना जा सकता। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रकार का योग्य कानूनी अधिकार स्थापित करने में विफल रहे हैं।
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इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, जबकि बिजली निगम को भविष्य की भर्तियां नई चयन प्रक्रिया के माध्यम से करने की राहत मिल गई है।