CLTA की नाबालिग खिलाड़ी से छेड़छाड़ केस, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को अंतिम फैसला सुनाने से रोका
चंडीगढ़ लॉन टेनिस एसोसिएशन में नाबालिग खिलाड़ी से छेड़छाड़ मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया ह ...और पढ़ें

छेड़छाड़, अश्लील टिप्पणियां करने और पीछा करने से आरोप। नाबालिग तीन महीने रही परेशान।
HighLights
दो आरोपितों को बालिग घोषित किए जाने के आदेश पर रोक।
आरोपितों की याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब।
हाईकोर्ट अब आयु निर्धारण प्रक्रिया की करेगा गहन जांच।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। चंडीगढ़ लॉन टेनिस एसोसिएशन (सीएलटीए) में प्रैक्टिस करने वाली नाबालिग खिलाड़ी से छेड़छाड़ केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल ट्रायल कोर्ट को अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया है।
हाईकोर्ट ने दो आरोपितों को बालिग घोषित किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही आरोपितों की याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन से भी जवाब तलब किया है। केस की सुनवाई जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की एकल पीठ ने की।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई के लिए निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक निचली अदालत इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाएगी।
सेक्टर-3 थाने में 17 अगस्त 2019 को दर्ज एफआईआर के अनुसार सीएलटीए के अधीन संचालित चंडीगढ़ अकादमी ऑफ रूरल टेनिस में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पांच लड़कों पर एक नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़, अश्लील टिप्पणियां करने तथा उसका पीछा करने के आरोप लगाए गए थे।
शिकायतकर्ता पिता ने पुलिस को बताया था कि उनकी 15 वर्षीय बेटी मार्च 2019 में सीएलटीए के अधीन संचालित अकादमी से जुड़ी थी। कुछ लड़के लगातार उसका पीछा करते और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहे। विरोध के बावजूद भी ये लड़के नहीं माने। नाबालिग तीन महीने तक परेशान रही
इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई। जांच के दौरान तीन आरोपितों को किशोर घोषित किया गया था। बाद में आयु निर्धारण को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आवेदन दायर किए जाने पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने विस्तृत कार्यवाही शुरू की।
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बोर्ड ने तीन आरोपितों को कानून से संघर्षरत किशोर मानते हुए उन्हें राहत प्रदान की, जबकि दो अन्य आरोपितों को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर बालिग घोषित कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि उन्होंने अपने मैट्रिक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, जिनमें उनकी जन्मतिथि क्रमशः 3 दिसंबर 2002 और 15 अप्रैल 2004 दर्ज है।
इसके विपरीत अभियोजन पक्ष ने प्राथमिक विद्यालय के रजिस्टर की प्रविष्टियों को आधार बनाया, जिन्हें पुलिस जांच में सत्यापित बताया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दोनों को वयस्क माना था, जिसे सत्र अदालत ने 6 दिसंबर 2022 के आदेश में बरकरार रखा।
अब हाईकोर्ट यह परीक्षण करेगा कि आरोपितों की आयु निर्धारण प्रक्रिया किशोर न्याय अधिनियम और स्थापित कानूनी मानकों के अनुरूप अपनाई गई थी या नहीं। तब तक ट्रायल की अंतिम कार्रवाई पर विराम लग गया है।