चंडीगढ़ में स्मार्ट पार्किंग का देख लो हाल... शुल्क पूरा, सुरक्षा जीरो; चोरी हुई तो नगर निगम ने झाड़े हाथ
चंडीगढ़ में नगर निगम की पार्किंग में वाहन चोरी होने पर निगम जिम्मेदारी नहीं लेता, जबकि पूरा शुल्क वसूलता है। एक व्यक्ति की एक्टिवा पार्किंग से चोरी हो ...और पढ़ें

पार्किंग वाहन की सुरक्षा का भरोसा नहीं।
HighLights
पार्किंग शुल्क पूरा, पर वाहन चोरी पर निगम बेबस।
मोहित गुप्ता की एक्टिवा पार्किंग से हुई चोरी।
निगम ने वाहन चोरी की जिम्मेदारी लेने से किया इनकार।
मनोज बिष्ट, चंडीगढ़। शहर में स्मार्ट पार्किंग सिस्टम पर सवाल उठे हैं। आपका वाहन चोरी होता है तो इसके लिए निगम जिम्मेदार नहीं है। नगर निगम पार्किंग शुल्क तो पूरे अधिकार से वसूलता है, लेकिन उसी पार्किंग से वाहन चोरी हो जाए तो उसकी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यानी नागरिक पैसे भी दें, वाहन की सुरक्षा का भरोसा भी न मिले और चोरी होने पर नुकसान भी खुद उठाएं।
वहीं अगर पार्किंग की पर्ची खो जाए तो वाहन मालिक से 100 रुपये जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन यदि लाखों रुपये का वाहन पार्किंग से चोरी हो जाए तो निगम लिखित में कह देता है कि इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं है तो फिर पार्किंग शुल्क आखिर किस बात का लिया जा रहा है।
सुबह पार्किंग में लगाई एक्टिवा, शाम को गायब मिली
सेक्टर-39 निवासी मोहित गुप्ता ने बताया वह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, 23 जुलाई को रोज की तरह अपनी एक्टिवा लेकर सेक्टर-17 पहुंचे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने ब्लिंकइट कार्यालय के सामने स्थित नगर निगम की अधिकृत पार्किंग में वाहन खड़ा किया और शुल्क भी जमा किया।
शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद लौटे तो पार्किंग से उनकी एक्टिवा गायब थी। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी, पुलिस केवल आनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सलाह देकर चली गई। मोहित ने जब पार्किंग संचालक से जवाब मांगा तो उन्हें साफ कह दिया गया कि पार्किंग से वाहन चोरी होने पर उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती। यानी पार्किंग शुल्क लेने वाले हाथ खड़े कर गए और पीड़ित अपने हाल पर छोड़ दिया गया।
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नगर निगम का जवाब और भी चौंकाने वाला
पीड़ित ने नगर निगम, उपायुक्त कार्यालय और प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मुआवजे की मांग की। नगर निगम ने अपने जवाब में स्पष्ट कर दिया कि पार्किंग में वाहन चोरी होने पर निगम की कोई जवाबदेही नहीं है।
वहीं उपायुक्त कार्यालय ने शिकायत संबंधित थाने को भेज दी, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह मामला नगर निगम की पार्किंग नीति पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
हर दिन हजारों वाहन, लेकिन सुरक्षा का कोई भरोसा नहीं
सेक्टर-17 सहित शहर की विभिन्न निगम पार्किंगों में प्रतिदिन हजारों वाहन खड़े होते हैं। लोग यह मानकर शुल्क देते हैं कि उनका वाहन सुरक्षित रहेगा।
निगम का जवाब यह संकेत देता है कि पार्किंग शुल्क केवल वाहन खड़ा करने की कीमत है, उसकी सुरक्षा की नहीं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पार्किंग परिसर में सीसीटीवी, सुरक्षा कर्मी और शुल्क वसूली के बावजूद वाहन सुरक्षित नहीं है, तो नागरिक आखिर किस भरोसे अपनी गाड़ी वहां खड़ी करें।
सिर्फ वसूली कर रहा एमसी : फाॅसवेक
फाॅसवेक अध्यक्ष बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि शहर की पेड पार्किंग सिर्फ एंट्री शुल्क वसूल करने की तरह चल रही है जबकि भीतर वाहनों की सुरक्षा के लिए कोई तैनात नहीं होता यहां तक कि वाहन चालकों की मदद के लिए भी कोई कर्मचारी तैनात नहीं होता है।
ऐसे में जब सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर निगम लेने को तैयार नहीं है तो फिर वसूली किस बात की कर रहा है। जबकि नगर निगम स्मार्ट पेड पार्किंग बनाने का दावा करता है।