बनती है कमेटी, नहीं होती जांच, किसी पर नहीं आती आंच...चंडीगढ़ नगर निगम में चल रहा ये कैसा खेल?
चंडीगढ़ नगर निगम में जांच कमेटियां बनती हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं होती, जिससे किसी पर कार्रवाई नहीं होती। यह प्रक्रिया 227 करोड़ के प ...और पढ़ें

चंडीगढ़ नगर निगम में लीपापोती के लिए गठित हो रही कमेटी।
HighLights
मामला शांत करने को तुरंत बना दी जाती है जांच कमेटी।
227 करोड़ के पाइपलाइन एजेंडे पर भी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी।
82 लाख सीसीटीवी, 7 करोड़ पार्किंग घोटाले में भी लीपापोती।
बलवान करिवाल, चंडीगढ़। नगर निगम में अलग ही खेल चल रहा है। किसी चीज पर सवाल उठते हैं तो मामला शांत करने के लिए तुरंत जांच कमेटी का गठन कर दिया जाता है। लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट कभी आती ही नहीं है।
आती भी है तो उसे कभी सदन के पटल पर या सार्वजनिक नहीं किया जाता। लीपापोती के लिए ऐसी कमेटी बन रही हैं। नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार ने 227 करोड़ रुपये के पाइपलाइन एजेंडे में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। स्पेशल कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी से सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।
82 लाख के सीसीटीवी मामले की नहीं आई रिपोर्ट
इससे पहले 82 लाख रुपये से धनास में सीसीटीवी कैमरे लगाने के मामले में भी स्पेशल कमिश्नर की अगुवाई में जांच समिति बनाई गई थी। उसे भी सात दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे। लेकिन महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई।
धनास में वार्ड डेवलपमेंट फंड से 82 लाख रुपये खर्च कर सीसीटीवी लगाए गए। जबकि वार्ड डेवलपमेंट फंड से सीसीटीवी लग ही नहीं सकते। जब दूसरे पार्षदों ने भी अपने वार्ड में ऐसे सीसीटीवी लगाने की मांग रखी तो मामला सामने आया। निगम सदन में कमिश्नर ने कमेटी गठित कर सात दिन में रिपोर्ट के आदेश दिए थे।
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पार्किंग बैंक गारंटी फर्जी निकलने में नहीं हुई कार्रवाई
करीब सात करोड़ का पार्किंग घोटाला हो चुका है। इसमें काॅन्ट्रेक्टर एजेंसी ने जो बैंक गारंटी दी थी वही फर्जी निकली थी। निगम ने इस बैंक गारंटी को चेक ही नहीं किया। इस मामले में काॅन्ट्रेक्टर, बैंक अधिकारी पर तो कार्रवाई हुई लेकिन निगम के अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच कमेटी बनी लेकिन जांच में किसी पर आंच नहीं आई है।
सेकेंड इनिंग्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके गर्ग का कहना है कि कोई भी मामला होने पर कमेटी बनाने में देर नहीं लगती। असल में कमेटी लीपापोती के लिए होती है। उस मामले को ठंडा करने के लिए।
कमेटी की क्या रिपोर्ट आई किस पर कार्रवाई हुई यह सामने नहीं आता। यह कमेटी जांच कर किसी की जिम्मेदारी तय करने की बजाए संलिप्त को बचाने का काम करती है। जनता की पाई-पाई का हिसाब कमेटी को लेना चाहिए। उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक कर कार्रवाई की जानकारी भी देनी चाहिए।