परमानेंट मेंबर के बच्चों को 60 हजार में एंट्री, आम लोगों के लिए खर्च नौ लाख; चंडीगढ़ गोल्फ क्लब की मेंबरशिप प्रक्रिया पर उठे सवाल
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब की सदस्यता प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं, जिसमें रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने सांसद को पत्र लिखकर 'परिवारवाद' का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा ...और पढ़ें

चंडीगढ़ के सबसे प्रतिष्ठित गोल्फ क्लब के मेंबरशिप सिस्टम को लेकर उठे सवाल।
HighLights
रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने गोल्फ क्लब की सदस्यता पर सवाल उठाए।
स्थायी सदस्यों के बच्चों को कम शुल्क पर ग्रीन कार्ड मिलता है।
आम लोगों के लिए सदस्यता शुल्क लाखों में, जांच की मांग।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। शहर के सबसे प्रतिष्ठित चंडीगढ़ गोल्फ क्लब के मेंबरशिप सिस्टम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-33 के रहने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर सुखदेव सिंह ने सांसद मनीष तिवारी को एक पत्र लिखकर कहा है कि गोल्फ क्लब में केवल कुछ परिवारों का दबदबा चल रहा है।
सुखदेव सिंह का आरोप है कि जहां एक ओर आम लोगों और उनके बच्चों को 9 लाख रुपये से अधिक खर्च करने के बाद भी गोल्फ क्लब की आसानी से मेंबरशिप नहीं मिलती, वहीं परमानेंट मेंबर के बच्चे केवल 60 हजार रुपये देकर ग्रीन कार्ड मेंबरशिप ले रहे हैं।
ग्रीन कार्ड मेंबरशिप 18 वर्ष से 21 वर्ष के बच्चों को मिलती है, जिन्हें 21 साल की उम्र पूरी होने से पहले गोल्फ के एक विशेष लेवल को पार करना होता है। इसके बाद ही उनकी ग्रीन कार्ड मेंबरशिप जारी रहती है।
हालांकि ब्रिगेडियर सुखदेव सिंह ने आरोप लगाया कि ऐसे कई ग्रीन कार्ड मेंबर हैं, जिन्हें गोल्फ खेलना भी नहीं आता। फिर भी वह अपने परिवारों के साथ ग्रीन कार्ड मेंबरशिप लेकर मौज कर रहे हैं। उन्होंने सांसद से मांग की है कि इस प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
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खेल को जानबूझकर इतना महंगा करने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि आम लोगों के लिए इस खेल को जानबूझकर इतना महंगा कर दिया गया है ताकि कोई इसकी सदस्यता ही न ल सके। उन्होंने बताया कि आम लोगों को सिर्फ मेंबरशिप का फार्म लेने के लिए 59 हजार रुपये देने पड़ते हैं। फिर रजिस्ट्रेशन के लिए 1.47 लाख रुपये जमा करवाने पड़ते हैं। यानी केवल रजिस्ट्रेशन तक ही खर्च दो लाख से ज्यादा हो जाता है।
इसके बाद उन्हें सीधा मेंबर नहीं बनाया जाता। पहले उन्हें मिडवीक मेंबर बनाया जाता है जिसके लिए उन्हें 7.43 लाख रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। यानी कुल 9.49 लाख रुपये देकर वह केवल मिडवीक मेंबर बनते हैं। इसके बावजूद उन्हें हर बार गोल्फ खेलने के लिए 1200 रुपये देने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि गोल्फ क्लब में तो अब कोई परमानेंट मेंबर भी नहीं बन सकता, क्योंकि वहां 1800 से ज्यादा मेंबर नहीं बन सकते। अगर कोई सदस्यता छोड़ता है या किसी का निधन होता है, तभी किसी को उनकी जगह पर मेंबरशिप दी जाती है। यानी लोग साढ़े नौ लाख रुपये खर्च करने के बाद भी परमानेंट मेंबर नहीं बन सकते।
दो हजार करोड़ की संपत्ति
रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने पत्र में क्लब की जमीन और संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गोल्फ क्लब करीब 132 एकड़ जमीन पर बना है और यह जमीन प्रशासन ने लीज पर दी है।
यानी यह एक सार्वजनिक संपत्ति है, फिर भी कुछ परिवारों ने यहां अपना प्रभाव जमा रखा है। उनका कहना है कि इस जमीन की कीमत दो हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल सीमित परिवार ही कर रहे हैं।
लोग कंडिशन पूरी करने के बाद ही बन रहे मेंबर : अध्यक्ष
गोल्फ क्लब के अध्यक्ष मेजर राजिंदर सिंह लाली विर्क का कहना है कि यह बहुत पुराना नियम है। काफी समय पहले कुछ सदस्यों के बच्चों को कुछ परिस्थितियों में ग्रीन कार्ड की कंडिशन में छूट दी गई थी, लेकिन अब जो भी ग्रीन कार्ड मेंबर बन रहे हैं, वह पूरे नियमों के मुताबिक बन रहे हैं।