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    ECHS घोटाले में नया खुलासा; CBI जांच में सामने आया अवैध दवाओं का कारोबार, क्लेम के लिए बड़ा खेल

    By Ravi Atwal Edited By: Sohan Lal
    Updated: Sun, 26 Apr 2026 12:32 PM (IST)

    ट्राईसिटी के निजी अस्पतालों में चल रहे ईसीएचएस घोटाले में सीबीआई ने अवैध दवाओं के कारोबार का खुलासा किया है। गैर-पंजीकृत निर्माताओं से दवाएं तैयार करा ...और पढ़ें

    कुछ निजी अस्पताल और उनसे जुड़े लोग गैर पंजिकृत निर्माताओं से दवाएं तैयार करवाते थे।

    कुछ निजी अस्पताल और उनसे जुड़े लोग गैर पंजिकृत निर्माताओं से दवाएं तैयार करवाते थे।

    HighLights

    1. गैर-पंजीकृत निर्माताओं से दवाएं तैयार करवाई जाती थीं।

    2. दवाओं को ईसीएचएस लाभार्थियों को सप्लाई किया जाता था।

    3. सेक्टर-38 के अस्पताल में बिना बिल के दवाओं का भंडारण।

    जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। ट्राईसिटी (चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली) के निजी अस्पतालों में चल रहे ईसीएचएस स्कीम के तहत हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में अब नया खुलासा हुआ है। सीबीआई जांच में सामने आया है कि यह महज फर्जी बिल बनाकर सरकार से क्लेम लेने का मामला नहीं है, बल्कि अवैध दवाओं का भी कारोबार चल रहा था।

    कुछ निजी अस्पताल और उनसे जुड़े लोग अज्ञात व गैर पंजिकृत निर्माताओं से दवाएं तैयार करवाते थे। इन पर कोई निगरानी नहीं होती थी। इन दवाओं को ईसीएचएस लाभार्थियों को सप्लाई किया जाता था और अस्पतालों में भी उपयोग किया गया। सीबीआई अब इस मामले से जुड़े और लोगों पर भी शिकंजा कस सकती है।

    जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने संदिग्ध दवा सप्लाई चेन बना रखी थी। सेक्टर-38 के एक अस्पताल में अवैध दवा काउंटर बनाया गया था। इस दवा काउंटर पर कुछ एक्सपायरी दवाएं भी थीं। यहां बिना बिल के दवाओं का भंडारण किया गया था। ऐसे में सीबीआइ ने इस मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

    जल्द हो सकती हैं गिरफ्तारी

    एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूट्री हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पकड़े गए घोटाले में डाॅक्टरों और अस्पतालों के खिलाफ सीबीआई ने केस दर्ज किया था। अब जांच तेज कर दी है। जांच के दौरान मिले अहम सबूतों के आधार पर आरोपित डाॅक्टरों और संबंधित कर्मियों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।

    खबरें और भी

    सीबीआई को जांच के दौरान पता चला है कि ट्राईसिटी के कई निजी अस्पतालों में बिना बीमारी के मरीजों को भर्ती दिखाकर करोड़ों रुपये के फर्जी क्लेम हासिल किए जा रहे थे। एजेंसी ने एक हजार से ज्यादा मरीजों का रिकाॅर्ड भी खंगाला जिसके आधार पर अब कई नए सबूत हाथ लगे हैं।

    इन अस्पतालों पर शिकंजा

    इस मामले में सीबीआई ने पिछले महीने सेक्टर-38 स्थित मंथन हेल्थ केयर, सेक्टर-15 के धर्म अस्पताल और सेक्टर-19 के केयर पार्टनर हार्ट सेंटर समेत कुल आठ के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआइआर दर्ज की है।

    मंथन हेल्थ केयर के निदेशक डाॅ. विकास शर्मा और डाॅ. रिंपल गुप्ता को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उनके नाम भी एफआइआर में शामिल हैं। आरोप है कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर या भर्ती किया जाता था, फिर फर्जी टेस्ट और दवाओं के नाम पर भारी बिल बनाकर सरकार से क्लेम लिया जाता था।

    कई मरीज तो ऐसे थे जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में कई बार दाखिल करवाया गया था। कई मरीज अब संबंधित अस्पतालों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं।