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अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा मंजूर! इंटरनेट मीडिया पर खुद को लिखा पूर्व अध्यक्ष, सियासी हलचल तेज

Published: Thu, 01 Oct 2026 02:35 PM (GMT+05:30)

पंजाब कांग्रेस में जारी खींचतान के बीच अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का इस्तीफा मंजूर हो गया है, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर खुद को पूर्व अध्यक्ष लिख दिया है।

अमरिंदर सिंह राजा वडिंग।

अमरिंदर सिंह राजा वडिंग।

HighLights

  1. राजा वड़िंग का पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा मंजूर।

  2. उन्होंने सोशल मीडिया बायो में खुद को 'पूर्व अध्यक्ष' बताया।

  3. अगले 48 घंटों में नए अध्यक्ष की घोषणा की उम्मीद।

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। बीती शाम से शुरू हुए घटनाक्रम और अटकलों को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने खुद विराम लगा दिया है। राजा वड़िंग का इस्तीफा पार्टी हाईकमान द्वारा मंजूर कर लिया गया है। राजा वड़िंग ने अपने इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल में बदलाव करते हुए खुद को 'पूर्व प्रसीडेंट, INC पंजाब' लिख दिया है।

यह पूरी कवायद पंजाब मामलों के प्रभारी सचिन पायलट की अंतरिम रिपोर्ट और पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत के बाद शुरू हुई। पूर्व पंजाब  प्रभारी भुपेश बघेल के होते हुए ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच तीखी खींचतान चल रही थी। इतना ही नहीं, पंजाब की बैठकों में खुल कर राजा वडिंग और बुपेश बघेल का विरोध भी हुआ।

विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए हाईकमान ने यह कड़ा कदम उठाया है।

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अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का इंटरनेट मीडिया अकाउंट:

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नए अध्यक्ष का नाम जल्द

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद अब नए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष की तलाश तेज हो गई है। अनुमान है कि अगले 48 घंटे के अंदर-अंदर नए प्रधान का नाम घोषित किया जा सकता है। राज्य में हिंदू और सिख समुदायों के बीच संतुलन साधने के लिए नए नाम पर मंथन जारी है।

इस दौड़ में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। लेकिन इस दौड़ में पूर्व हॉकी कप्तान परगट सिंह और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम भी चर्चा में हैं। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान अगले 24 से 48 घंटों के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा कर सकता है।

एकजुटता ही सबसे बड़ी चुनौती

2027 विधानसभा चुनाव में मजबूत होने के मकसद से कांग्रेस ने 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' जैसे सांगठनिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। जिसमें वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। खुल कर विरोध भी हुआ। भूपेश बघेल की कोशिशें और फिर प्रभारी पद पर सचिन पायलट के आने के बाद भी गुटबाजी पूरी तरह शांत नहीं हुई।

अब सचिन पायलट की तैयार रिपोर्ट के बाद हाईकमान ने नए सिरे से कमान सौंपने का फैसला लिया। अगले 24 से 48 घंटे में साफ हो पाएगा कि पंजाब कांग्रेस का नया सरदार किसे चुना जाता है।

गुटबाजी से पहले भी नुकसान उठा चुकी कांग्रेस

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी से पहले भी नुकसान उठाती आई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के समय से भी ऐसा होता आया है। पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह और राजिंदर कौर भट्‌ठल के बीच गुटबाजी का दौर चला। फिर 2021 में पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू से तकरार के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा।

इतना ही नहीं 2022 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भी सीएम चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के कारण पार्टी में खींचतान देखने को मिली थी। जिसके कारण पार्टी जो पहले 77 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, मात्र 18 सीटों पर आकर सिमट गई। 

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