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    सतलुज किनारे बाढ़ सुरक्षा मजबूत, पांच करोड़ खर्च और केंद्र को भेजी डीपीआर

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 01:49 PM (IST)

    सतलुज नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा पर पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, और क्षतिग्रस्त ढांचों के पुनर्निर्माण की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी गई है। ...और पढ़ें

    सतलुज किनारे बाढ़ सुरक्षा के लिए पांच करोड़ खर्च (फाइल फोटो)

    सतलुज किनारे बाढ़ सुरक्षा के लिए पांच करोड़ खर्च (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सतलुज बाढ़ सुरक्षा पर पांच करोड़ रुपये खर्च।

    2. क्षतिग्रस्त ढांचों की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी।

    3. फिरोजपुर ग्रामीण गांवों में बाढ़ सुरक्षा मजबूत हुई।

    रोहित कुमार, चंडीगढ़। सतलुज नदी के किनारे बसे फिरोजपुर ग्रामीण क्षेत्र के गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने का मुद्दा विधानसभा में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के तहत उठा। फिरोजपुर ग्रामीण के विधायक एडवोकेट रजनीश कुमार दहिया ने नियम 66 के तहत सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर दिलाया।

    उन्होंने कहा कि ममदोट उप-तहसील के गांव दोना तेलू मल्ल, कालू अराइयां हिठाड़, फत्तेवाला हिठाड़, रुहेला हाजी, गंधू किलचा हिठाड़ और निहाला किलचा सतलुज नदी के किनारे स्थित हैं। पिछले वर्षों में आई बाढ़ के कारण नदी किनारे बने सुरक्षा ढांचे कमजोर हो चुके हैं।

    कई जगहों पर पत्थर निकल रहे हैं और बरसात के मौसम में ग्रामीणों तथा उनकी फसलों पर खतरा बना हुआ है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन पुराने ढांचों का पुनर्निर्माण कब तक पूरा किया जाएगा।

    जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सदन में स्पष्ट किया कि प्रश्न में बताए गए स्टड नंबर 512 से 520 के लिए विभाग अलग से ऐसी नंबरिंग नहीं करता। बाढ़ सुरक्षा के सभी कार्य फ्लड प्रोटेक्शन बंध की आरडी प्रणाली के आधार पर चिन्हित और निगरानी किए जाते हैं।

    मंत्री ने बताया कि दोना तेलू मल्ल में फ्लड प्रोटेक्शन बंध के साथ आरडी 12,410 से 16,500 के बीच सुरक्षा ढांचे वर्ष 1995 के आसपास बनाए गए थे। पिछले बाढ़ सीजन में पानी का स्तर बढ़ने और ढांचों के पानी में डूबने से बंध के किनारे बने दो स्पर और आठ स्टड क्षतिग्रस्त हुए थे। हालांकि मुख्य फ्लड प्रोटेक्शन बंध पूरी तरह सुरक्षित रहा और उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।

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    डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र को भेजी

    गोयल ने बताया कि क्षतिग्रस्त ढांचों की मौजूदा स्थिति का फील्ड निरीक्षण कराया जा चुका है। फील्ड कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इनके मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम में शामिल की गई है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी के लिए भारत सरकार को भेज दी गई है।

    मंत्री ने कहा कि वर्ष 2026-27 के फ्लड प्रीपेयर्डनेस प्रोग्राम के तहत ममदोट क्षेत्र में बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों की व्यापक समीक्षा की गई। निगरान इंजीनियरों की कमेटी ने मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा उपाय सुझाए। इसके बाद मुख्य इंजीनियरों की उच्चस्तरीय कमेटी ने प्रस्तावों की समीक्षा कर प्राथमिकता तय की।

    उन्होंने बताया कि गंधू किलचा हिठाड़ में आरडी 10,650 से 11,700 के बीच एक नया स्पर, 700 फुट जियो-बैग रिवेटमेंट और पांच स्टड बनाए गए हैं। इन कार्यों पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। सरकार के अनुसार इन उपायों से सतलुज किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि की बाढ़ से सुरक्षा मजबूत हुई है।