स्टालिन, पलानीस्वामी या विजय, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में कौन सा चेहरा चमकेगा?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है। अभिनेता विजय की एंट्री ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है, खासकर युवा वोटरों के बीच। आइए ...और पढ़ें
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तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के तारीखों का एलान हो चुका है। आगामी चुनाव तमिलनाडु के लिए आगामी चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का जरिया नहीं, बल्कि राज्य के तीन कद्दावर चेहरों के लिए अग्निपरीक्षा के समान हैं।
तमिलनाडु के चुनावी मैदान में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन हैं, तो दूसरी तरफ एडप्पाडी के. पलानीस्वामी हैं। इस बीच अभिनेता से नेता बने विजय की राजनीति में एंट्री कर यहां की राजनीतिक समीकरणों को अनिश्चित बना दिया है। वहीं बीजेपी भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
एमके स्टालिन
मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, शासन के रिकॉर्ड और विकास परियोजनाओं के आधार पर एक और जनादेश मांग रहे हैं। स्टालिन ने खुद को तमिल पहचान और फेडरल अधिकारों के रक्षक के तौर पर पेश किया है। उनकी पार्टी डीएमके करीब 20 पार्टियों के एक बड़े गठबंधन का नेतृत्व करती है।

डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अपनी राजनीतिक पकड़ द्रविड़ियन मॉडल ऑफ गवर्नेंस के आस-पास बनाया है। स्टालिन सरकार ने सोशल वेलफेयर, एजुकेशन और पब्लिक हेल्थ में पहलों को हाईलाइट किया है। इसके अलावा स्टालीन ने फंड को लेकर केंद्र के साथ अपनी राजनीतिक लड़ाई को तमिलनाडु के अधिकारों के लिए एक बड़ी लड़ाई के हिस्से के तौर पर दिखाया है।
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इसी के दम पर स्टालिन ने विधानसभा चुनाव को तमिलनाडु और दिल्ली के बीच एक बड़े मुकाबले के तौर पर पेश किया है। लेकिन इस बार के चुनाव में सत्ता हासिल करना स्टालिन के लिए बड़ी चुनौती है।
के. पलानीस्वामी
पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी, जिन्हें अक्सर EPS कहा जाता है, सत्ताधारी DMK के खिलाफ AIADMK की चुनौती का नेतृत्व करेंगे। AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी स्टालिन के लिए मुख्य चैलेंजर हैं। AIADMK की कमान संभालने के बाद से, EPS ने BJP के साथ रिश्ते फिर से बनाने के साथ-साथ गठबंधन फिर से बनाने की कोशिश की है।

AIADMK को 2021 से कई चुनावी झटके लगे हैं। कई सीनियर नेता, बार-बार चुनावी हार से निराश होकर, DMK और एक्टर विजय की TVK जैसी दूसरी पार्टियों में चले गए हैं।
पलानीस्वामी DMK सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी पर बहुत ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जिसमें बढ़ते क्राइम, नारकोटिक्स केस और मंत्रियों पर करप्शन के आरोपों की चिंता है। हालांकि, तमिलनाडु की राजनीति में विजय की पार्टी के आने से सरकार विरोधी वोट बंटने का खतरा है।
AIADMK के लिए यह चुनाव सिर्फ सरकार को चुनौती देने के बारे में नहीं है। बल्कि, यह साबित करने के बारे में है कि AIADMK तमिलनाडु की राजनीति में एक ताकत बनी हुई है।
विजय
तमिलनाडु में लंबे समय से फिल्म एक्टर रहे विजय की एंट्री ने यहां के चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। क्योंकि, जयललिता के बाद से, कुछ ही लोग सिनेमा की पॉपुलैरिटी को लगातार पॉलिटिकल असर में बदल पाए हैं। एक्टर विजय अब उस कहानी को फिर से दोहराने की चक्कर में हैं।
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2024 में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की शुरुआत के साथ अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए विजय ने राज्य की दो बड़ी द्रविड़ ताकतों के विकल्प के तौर पर पेश किया। अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत के साथ अभिनेता विजय ने DMK को अपना मुख्य पॉलिटिकल दुश्मन बताया, जबकि BJP को अपना आइडियोलॉजिकल विरोधी बताया।
इस दोहरी आलोचना ने उनके कैंपेन की कहानी को काफी हद तक आकार दिया है, जिससे उन्हें तमिलनाडु की स्टालिन सरकार के साथ-साथ मोदी के नेतृत्व वाले केंद्र की बड़ी पॉलिसी, दोनों पर सवाल उठाने का मौका मिला।
अभिनेता विजय की नई पार्टी के रूप में एक बड़ा 'एक्स-फैक्टर' चुनावी मैदान में उतर चुका है। एक्टर विजय की एंट्री से तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। क्योंकि, उनके रोड शो और पब्लिक मीटिंग्स में भारी भीड़ उमड़ी है, खासकर युवा वोटर्स के बीच। विजय की पॉपुलैरिटी युवाओं के बीच सबसे अधिक बनी हुई है।
DMK, AIADMK और TVK तीनों ही पार्टी के इन तीनों दिग्गज नेताओं ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि आखिर तमिलनाडु की राजनीति में कौन सा चेहरा अपनी किस्मत चमकाने में कामयाब हो सकता है।