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अटल-आडवाणी से नड्डा-नवीन तक... BJP में 45 साल में बने 12 अध्यक्ष, देखें लिस्ट

Updated: Tue, 20 Jan 2026 10:34 AM (IST)

भारतीय जनता पार्टी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी को शुरू हुई है। अब तक नितिन नवीन कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी के 45 साल के ...और पढ़ें

बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है। (जागरण)

बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है। (जागरण)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की आज यानी 20 जनवरी 2026 को ताजपोशी होनी है। सोमवार को उन्होंने नामांकन दाखिल किया था और निर्विरोध चुने गए थे। थोड़ी देर बाद ही बीजेपी उन्होंने आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करेगी। इसके साथ ही नितिन नवीन बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

गौरतलब है कि पिछले साल नितिन नवीन को पार्टी ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। साल 2019 में पार्टी में कार्यकारी अध्यक्ष पद का सृजन हुआ। नितिन बिहार के बांकीपुर सीट से विधायक हैं। बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों का होता है। हालांकि इस अवधि को संसदीय बोर्ड बढ़ा भी सकता है।

नितिन नवीन के सामने देश की सबसे बड़ी पार्टी को संभालने का दारोमदार है। इसके साथ ही पार्टी को दक्षिण भारत में मजबूत करने का भार भी है। उनका संघ से भी जुड़ाव है। 

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कैसा होता है बीजेपी का निर्वाचक मंडल?

बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निवार्चक मंडल है। इसमें 5708 सदस्य हैं। इस मंडल में देश की राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की संगठनात्मक चुनाव के जरिए चुने सदस्यों को शामिल किया जाता है।

इसके अलावा राष्ट्रीय परिषद में भी 35 सदस्य शामिल होते हैं। इसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा भी शामिल है।

गौरतलब है कि बीजेपी में स्थापना से लेकर अबतक 12 राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं। हालांकि अब तक किसी भी अध्यक्ष के लिए मतदान की नौबत नहीं आई है। यानी सभी अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए हैं।

अब तक कौन-कौन रहे बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष?

'अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा'

1980 में जनसंघ के बाद उभरी भाजपा में 11 राष्ट्रीय अध्यक्ष बे और सभी निर्विरोध चुने गए। आपातकाल के बाद की राजनीतिक उथल-पुथल में अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नानाजी देशमुख, के.आर. मल्कानी, सिकंदर बख्त, विजय कुमार मल्होत्रा, विजयराजे सिंधिया, भैरौं सिंह शेखावत, शांता कुमार, राम जेठमलानी और जगन्नाथराव जोशी ने भाजपा की नींव रखी थी।

तब जनता पार्टी का प्रयोग विफल हो चुका था और वाजपेयी ने पार्टी को एक उदार हिंदुत्व वाली राष्ट्रीय शक्ति बनाने का सपना देखा था। उनका कार्यकाल (1980-1986) पार्टी की आधारशिला था।

पार्टी की पहले अधिवेशन में अटल बिहारी वाजपेयी ने भाषण दिया, "अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।"

लेखक विनय सीतापति ने अपनी किताब 'जुगलबंदी: द बीजेपी विफोर मोदी' में बताया है कि कैसे अटल बिहारी वाजपेयी की काव्यात्मक शैली ने बीजेपी को आरएसएस के समांतर रखते हुए पार्टी को आगे बढ़ाया। किताब में वाजपेयी को 'उदार योद्धा' कहा गया है।

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फोटो सोर्स- पेंगुइन पब्लिकेशन

जिन्ना को 'धर्मनिरपेक्ष' कहने पर आडवाणी को देना पड़ा था इस्तीफा

अटल बिहारी वाजपेयी के बाद बीजेपी की कमान लाल कृष्ण आडवाणी ने संभाली। लाल कृष्ण आडवाणी तीन बार (1986-1990, 1993-1998, 2004-2005) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। आडवाणी को पार्टी को हिंदुत्व की मुख्यधारा में लाने का श्रेय दिया जाता है। उनका पहला कार्यकाल उत्तर भारत में आधार मजबूत करने का था।

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साल 1990 की राम रथ यात्रा के दौरान आडवाणी की राजनीति का लोहा देश भर में माना जाने लगा था। यह यात्रा सोमनाथ से अयोध्या तक थी। इस दौरान आडवाणी ने राम मंदिर आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया।

लेखक सबा नकवी अपनी किताब 'शेड्स ऑफ शेफरॉन' में बताती हैं कि इस रथ यात्रा के दौरान बिहार में लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी को गिरफ्तार करवाया। लेकिन इससे आंदोलन और भड़क गया। इस यात्रा ने बीजेपी के लिए खाद की तरह काम किया और भाजपा की सीटें 2 से बढ़कर 120 हो गईं।

हालांकि 2005 में आडवाणी ने पाकिस्तान में जिन्ना को 'धर्मनिरपेक्ष' कहा था। इसके बाद पार्टी में इतना बवाल मच गया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी

आडवाणी के बाद डॉ. मुरली मनोहर जोशी (1991-1993) ने पार्टी की कमान संभाली थी। तब राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। उनका कार्यकाल विपक्ष को मजबूत करने का था और 1991 में भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी।

जोशी के कार्यकाल के दौरान ही बाबरी मस्जिद विवाद हुआ था। 1992 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद जोशी ने कहा था कि यह इतिहास का मोड़ है और वे खुद मौके पर थे। मुरली मनोहर जोशी ने आरएसएस की विचारधारा को पार्टी में मजबूत किया। जोशी बाद में वाजपेयी सरकार में मंत्री बने।

कुशा भाऊ ठाकरे

कुशा भाऊ ठाकरे का कार्यकाल पहली पूर्ण एनडीए सरकार का था। वे आरएसएस से थे और उन्होंने संगठन मजबूत करने पर जोर दिया है। ठाकरे कार्यकर्ताओं से कहते थे कि पार्टी संगठन परिवार है। वे आरएसएस की संस्कृति से प्रेरित थे शांतनु गुप्ता की किताब 'भारतीय जनता पार्टी: पास्ट, प्रेजेंट एंड फ्यूचर' में बताते हैं कि कुशा भाऊ ठाकरे ने ही मध्य प्रदेश पार्टी का आधार बनाया था। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में कैंप लगाकर प्रचार करने का आइडिया भी उनका ही था ।

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भ्रष्टाचार के आरोप में देना पड़ा था इस्तीफा

बंगारु लक्ष्मण का 2000-2001 तक छोटा सा कार्यकाल रहा। वे पहले दलित अध्यक्ष थे। उनका सामाजिक समावेश पर फोकस था। बंगारु लक्ष्मण कार्यकाल विवादों से भरा था। एक स्टिंग ऑपरेशन की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। दरअसल तहलका मैगजीन ने लक्ष्मण को कथित तौर पर रिश्वत लेते कैमरे में कैद कर लिया था। तब उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा, "मैं निर्दोष हूं, लेकिन पार्टी की छवि बचानी है।"

इसके बाद के. जाना कृष्णमूर्ति (2001-2002) ने पार्टी की कमान संभाली। बंगारू लक्ष्मण के बाद उन्होंने पार्टी फिर से दुरुस्त करने की दिशा में काम किया। कृष्णमूर्ति भाजपा के दक्षिण भारत में विस्तार के लिए भी जाने जाते हैं। पार्टी को दक्षिण भारत में स्थापित करने और प्रचार करने के पीछे उनका बड़ा हाथ माना जाता है।

वेंकैया नायडू (2002-2004)

के. जाना कृष्णमूर्ति के बाद पार्टी ने वेंकैया नायडू पर भरोसा जताया। वेंकया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए पार्टी ने पार्टी ने उत्तर भारत में फिर से पकड़ मजबूत की थी। हालांकि इस दौरान ही बीजेपी को सत्ता से हटना पड़ा था और चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

साल 2005 में राजनाथ सिंह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वह दो बार (2005-2009, 2013-2014) संगठन के अध्यक्ष बने। इस दौरान पार्टी को कई राज्यों में जीत हासिल हुई और संगठन के कैडर को मजबूत करने में राजनाथ सिंह की बड़ी भूमिका मानी जाती है।

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'नई' भाजपा में अध्यक्ष

नितिन गडकरी (2010-2013) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने संगठन आधुनिक बनाया। कहा जाता है कि गडकरी सादगी को इतना पसंद करते थे कि साइकिल से मीटिंग जाते थे। साल 2014 में अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

अमित शाह के कार्यकाल में पार्टी को अभूतपूर्व सफलता मिली। कई राज्यों में पार्टी को प्रचंड जनादेश मिला। अमित शाह के कार्यकाल के दौरान ही पीएम नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने। 2019 चुनाव में शाह ने राज्य-दर-राज्य रणनीति बनाई। राज्यों के जातीय समीकरण को साधा और पार्टी को इसका फायदा मिला।

अमित शाह के बाद जगत प्रकाश नड्डा साल 2020 में बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनके कार्यकाल के दौरान कोविड-19 की चुनौतियों को देखना पड़ा। संगठन को बांधे रखने के लिए उन्होंने स्ट्रैटजी बनाए।

Source:

https://www.bjp.org/bjp-presidents 

Book Source:

Jugalbandi: The BJP Before Modi
Shades of Saffron: From Vajpayee to Modi
The Saffron Wave" by Thomas Blom Hansen

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