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    बंगाल चुनाव में शब्दों की जंग: 'इस्तहार' बनाम 'घोषणापत्र' पर छिड़ा सियासी संग्राम

    Updated: Fri, 03 Apr 2026 06:39 AM (IST)

    भाजपा का तर्क है कि 'इस्तहार' एक उर्दू शब्द है और इसका उपयोग बंगाल की भाषा व संस्कृति का अपमान है। पार्टी का कहना है कि इसके लिए 'घोषणापत्र' शब्द का प ...और पढ़ें

    बंगाल चुनाव, 'इस्तहार' बनाम 'घोषणापत्र', भाषा बना चुनावी हथियार (फोटो- एक्स)

    बंगाल चुनाव, 'इस्तहार' बनाम 'घोषणापत्र', भाषा बना चुनावी हथियार (फोटो- एक्स)

    HighLights

    1. भाजपा ने बताया उर्दू शब्द, भाषाविदों ने कहा- यह बंगाली संस्कृति का अभिन्न हिस्सा 

    2. भाषाविदों और विद्वानों ने भाजपा के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है

    राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच अब शब्दों के चयन पर राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा जारी 'इस्तहार' (मैनिफेस्टो) को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

    भाजपा का तर्क है कि 'इस्तहार' एक उर्दू शब्द है और इसका उपयोग बंगाल की भाषा व संस्कृति का अपमान है। पार्टी का कहना है कि इसके लिए 'घोषणापत्र' शब्द का प्रयोग किया जाना चाहिए। भाषाविदों और विद्वानों ने भाजपा के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है।

    कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुनंदन सेन के अनुसार, 'इस्तहार' मूल रूप से अरबी शब्द 'इशतिहार' से आया है, जो सदियों पहले फारसी के माध्यम से बांग्ला शब्दकोश में शामिल हुआ।

    तर्क दिया कि जिस तरह हम 'जमीन', 'हवा' और 'लाल' जैसे शब्दों का सहजता से प्रयोग करते हैं, उसी तरह 'इस्तहार' भी बांग्ला की रगों में बसा है। इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रबाल दासगुप्ता ने इस विवाद को 'जल-पानी' की राजनीति करार दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भाषा को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखना बंगाल की भाषाई विविधता को नष्ट करने की कोशिश है।

    चर्चा इस बात पर भी है कि क्या भाजपा अपनी इस रणनीति के जरिए 'बाहरी' होने के तमगे को हटाकर खुद को कट्टर बंगाली संस्कृति का रक्षक दिखाना चाहती है या फिर यह केवल मतों के ध्रुवीकरण का एक और प्रयास है।