राजस्थान निकाय चुनाव में होगी परीक्षा, CJP के 'स्कूल ठीक करो' आंदोलन के बाद ग्राउंड रियलिटी जांचने उतरेगी भाजपा
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर दिन-भर लंबी बैठकें कीं। ...और पढ़ें

बीजेपी राजस्थान के स्थानीय चुनावों को राजनीतिक जांच का माध्यम बना रही है
HighLights
भाजपा ने पूर्व उत्तर प्रदेश सांसद हरीश द्विवेदी को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ नगर निगम जीतना ही मकसद नहीं है
डिजिटल डेस्क, जयपुर। भाजपा राजस्थान के नगर निकाय चुनावों को सामान्य स्थानीय चुनाव की तरह नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षण के रूप में देख रही है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का इन चुनावों पर असामान्य रूप से ज्यादा ध्यान इस बात का संकेत है।
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर दिन-भर लंबी बैठकें कीं। पार्टी ने पूर्व उत्तर प्रदेश सांसद हरीश द्विवेदी को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है।
साथ ही छह सह-प्रभारी भी तैनात किए गए हैं, जिनमें महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री रवींद्र इंद्रजीत सिंह शामिल हैं। बीकानेर जैसे दूर के क्षेत्र में भी महाराष्ट्र की टीम काम कर रही है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि बीजेपी हाथी है और हाथी चलता रहता है। हम हर चुनाव को गंभीरता से लेते हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ नगर निगम जीतना ही मकसद नहीं है। नगर निकाय और पंचायत चुनाव जल्दी-जल्दी होने वाले हैं। बीजेपी इनके जरिए कार्यकर्ताओं का मनोबल, जाति समीकरण, युवा मतदाताओं का रुझान और खासकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर मंतर प्रदर्शन के राजनीतिक असर का आकलन करना चाहती है।
सीजेपी ने जुलाई में दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तक करवाया था। इसने राजस्थान में स्कूलों की खराब इमारतों का मुद्दा भी उठाया है।
इसलिए ये चुनाव युवा मतदाताओं के रुझान को समझने का अच्छा मौका हैं। 1.4 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं में करीब 26 प्रतिशत युवा मतदाता हैं।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को 10 महत्वपूर्ण नगर निगमों में मेगा रोड शो करने को कहा गया है। वे शनिवार को भीलवाड़ा से अभियान शुरू करेंगे और फिर उदयपुर में बड़ा रोड शो करेंगे। पार्टी का संदेश साफ है कि स्थानीय चुनाव को हल्के में नहीं लिया जाए। हर सांसद, विधायक और कार्यकर्ता मैदान में उतरे।
