बृजभूषण सिंह ने आरोपों से बरी होने के बाद बोला हमला, राजनीतिक साजिश का लगाया आरोप
भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण सिंह यौन उत्पीड़न के आरोपों से बरी हो गए हैं। उन्होंने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पूर्व सीए ...और पढ़ें

बृज भूषण सिंह

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती संघ (WFI) ने पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण सिंह का आरोपों से बरी होने के बाद सामने आया है। उनके ऊपर आरोप था कि उन्होंने महिला पहलवानों का यौन शोषण किया है। इस वजह से उन्हें अपने पद से हटना पड़ा। यहां तक कि वे 2024 लोकसभा का चुनाव भी नहीं लड़ सके। हालांकि, इन आरोपों को कोर्ट ने निराधार बताया और पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष को बरी कर दिया।
बरी होने के बाद बृज भूषण इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके परिवार पर बड़ा आरोप लगाया है। सिंह का कहना है कि उनके खिलाफ बयान देने के लिए वहीं पहलवान सामने आए, जो उस अखाड़े से जुड़े हुए थे, जो हुड्डा परिवार के बहुत करीब है।
अदालत की टिप्पणियों पर बृज भूषण का जवाब
एएनआई से बात करते हुए बृज भूषण ने कहा कि अदालत ने आरोपों के पीछे की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक खास अखाड़े का जिक्र किया, जो हुड्डा परिवार से जुड़ा बताया जाता है। उनके अनुसार, इस मामले में मुख्य रूप से उसी अखाड़े के खिलाड़ी सामने आए, न कि हरियाणा के दूसरे अखाड़ों के पहलवान। यह बात फैसले में भी झलकती है।
उन्होंने दो पहलवानों के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन पहलवानों ने जज के चेंबर में जो कुछ बताया, उसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया और उसी आधार पर फैसला सुनाया गया। बृज भूषण ने शिकायतकर्ताओं के पते को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जिलों से आने वाले पहलवानों ने शिकायत में एक ही पता दिया है। वह पता सोनीपत में बजरंग पूनिया का निवास बताया गया।
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बृजभूषण ने बताया राजनीति से प्रेरित मामला
उन्होंने इस मामले में राजनीतिक भूमिका का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, हुड्डा परिवार सबसे पहले इस मुद्दे पर सामने आया। अब आगे उनकी क्या चाल चलती है, यह देखना बाकी है। इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि बृज भूषण के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित और गढ़े हुए लगते हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका और कई गवाह मुकदमे के दौरान पक्ष बदल गए।