फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हूं: साक्षी चौधरी
भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी जापान में होने वाले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी कर रही हैं। वह ...और पढ़ें

साक्षी चौधरी की नजरें एक और गोल्ड मेडल पर
HighLights
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य- साक्षी
फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर कर रही हैं काम
ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना है सबसे बड़ा सपना
शेखर झा, जागरण, नई दिल्ली। भारतीय युवा मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 25 वर्षीय साक्षी अब आगामी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार हैं और इन दिनों रिंग में कड़ी मेहनत कर रही हैं। जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियाई खेलों में उनकी नजर एक बार फिर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतने पर है।
साक्षी इन दिनों फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हैं। साक्षी चौधरी से शेखर झा ने विशेष बातचीत की। पेश है प्रमुख अंश:--
सवाल-एशियाई खेलों के लिए आपकी तैयारी कैसी चल रही है?
साक्षी- भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए हमेशा गर्व की बात है और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर देश के लिए खेलना मेरे लिए बहुत खास है। तैयारी अच्छी चल रही है और मैं अपनी फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर लगातार काम कर रही हूं। हाल की प्रतियोगिताओं से मुझे अच्छा आत्मविश्वास मिला है।
सवाल- आपके लिए एशियाई खेलों में सबसे बड़ी चुनौती क्या रहने वाली है?
साक्षी- एशियाई खेलों में एशिया के कई मजबूत देशों के अच्छे मुक्केबाज हिस्सा लेंगे, इसलिए मुकाबले कड़े होंगे। मैं इसे एक अच्छी चुनौती के रूप में देखती हूं और इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं। विश्व कप और राष्ट्रमंडल खेलों में मिले अनुभव से मुझे अलग-अलग शैली के मुक्केबाजों के विरुद्ध खेलने की समझ मिली है। मैं अपने प्रतिद्वंद्वियों के खेल को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही हूं, लेकिन रिंग में परिस्थिति के अनुसार खुद को बदलना भी उतना ही जरूरी होगा।
सवाल- राष्ट्रमंडल खेलों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव ने आपकी मुक्केबाजी में किस तरह बदलाव किया है?
साक्षी- बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों ने मुझे रिंग के अंदर और बाहर दोनों जगह बहुत कुछ सिखाया है। अब मैं मुकाबले के दौरान परिस्थितियों को जल्दी समझकर सही फैसला लेने में पहले से ज्यादा सक्षम हूं। पहले मेरा ध्यान सिर्फ अपनी तकनीक पर होता था, लेकिन अब मैं प्रतिद्वंद्वी के खेल को पढ़ने और उसी के अनुसार अपनी रणनीति बनाने पर भी उतना ही ध्यान देती हूं। इन अनुभवों ने मुझे ज्यादा शांत, समझदार और आत्मविश्वासी मुक्केबाज बनाया है।
सवाल- एशियाई खेलों में आप पर पदक जीतने की उम्मीद और दबाव दोनों होंगे। आप इस दबाव को किस तरह संभालती हैं?
साक्षी- मैं लोगों की उम्मीदों को दबाव की तरह नहीं लेती। जब लोग मुझ पर भरोसा करते हैं और मुझसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद करते हैं तो यह मेरे लिए प्रेरणा बनता है। मुझे पता है कि रिंग में उतरने के बाद कोई बाहरी चीज मेरे लिए मुकाबला नहीं जीत सकती, वहां सिर्फ मेरी तैयारी और मेरा प्रदर्शन मायने रखता है। इसलिए मैं उम्मीदों के बारे में ज्यादा सोचने के बजाय अपनी तैयारी और अपने खेल पर ध्यान देती हूं।
सवाल- एशियाई खेलों में आपकी नजर किस पदक पर है?
साक्षी- मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है। मैं हर प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ देने और सबसे ऊपर पहुंचने के इरादे से उतरती हूं। लेकिन मैं एक साथ पूरी प्रतियोगिता के बारे में नहीं सोचती, हर मुकाबले को एक-एक करके लेना जरूरी है। मेरा ध्यान हर राउंड में अपनी रणनीति सही तरीके से लागू करने और जीत की ओर आगे बढ़ने पर रहेगा।
सवाल- आपके करियर में ऐसा कौन सा मुकाबला रहा है, जिसने आपको मानसिक रूप से सबसे ज्यादा मजबूत बनाया और एशियाई खेलों में उसका अनुभव कैसे काम आएगा?
साक्षी- मेरे लिए चोट के बाद वापसी का दौर बहुत महत्वपूर्ण रहा। उस समय मैंने सीखा कि खिलाड़ी की असली परीक्षा सिर्फ रिंग में नहीं, बल्कि उस समय भी होती है जब उसे धैर्य के साथ वापस आने का इंतजार करना पड़ता है। परिवार, कोच और मेरी पूरी टीम ने उस समय मेरा बहुत साथ दिया। उस अनुभव ने मुझे सिखाया कि मुश्किल समय में खुद पर भरोसा रखना कितना जरूरी है। एशियाई खेलों में भी यही सोच मुझे किसी भी चुनौती से मजबूती से निपटने में मदद करेगी।
सवाल- अगर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतती हैं तो उसके बाद आपका अगला बड़ा लक्ष्य क्या होगा?
साक्षी- ओलंपिक स्वर्ण पदक मेरा सबसे बड़ा सपना है और जब से मैंने मुक्केबाजी शुरू की है, तब से मैं इस सपने के लिए मेहनत कर रही हूं। एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतना उस सफर का एक बहुत महत्वपूर्ण कदम होगा। लेकिन मैं अभी से आगे की चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोच रही हूं। फिलहाल मेरा पूरा ध्यान एशियाई खेलों पर है। उसके बाद मेरा लक्ष्य लॉस एंजिल्स 2028 की तैयारी और ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण जीतना होगा।
