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    मेरठ सेंट्रल मार्केट का ध्वस्तीकरण पिछली सरकार के भ्रष्टाचार और कुशासन की देन, SC का निर्णय और योगी सरकार की मजबूरी

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 06:35 AM (IST)

    मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अवैध व्यावसायिक इकाइयों को सील और ध्वस्त किया जा रहा है। यह कार्रवाई पिछली सरकारों, ...और पढ़ें

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    भावेष पांडेय। मेरठ का शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट एक समय शहर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र रहा, लेकिन आज यह अवैध निर्माणों, राजनीतिक संरक्षण और लंबे कानूनी विवाद का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद यहां 44 अवैध व्यावसायिक इकाइयों की सीलिंग और सैकड़ों अन्य संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तेज हो गई है। यह कार्रवाई कोई अचानक फैसला नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परिणति है।

    1980 के दशक के अंत में आवास विकास विभाग ने इस क्षेत्र में आवासीय प्लॉट आवंटित किए थे। लेकिन कुछ ही वर्षों में इन प्लॉटों पर बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निर्माण शुरू हो गए-दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल और बैंक तक बन गए। 1990 के आसपास ही शिकायतें और मुकदमे शुरू हुए, लेकिन उस समय की सरकारों ने इन अनियमितताओं पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

    सपा शासन में भ्रष्टाचार और अप्रत्यक्ष संरक्षण
    सबसे गंभीर स्थिति समाजवादी पार्टी के शासनकाल (विशेषकर 2012-2017) में बनी। इस दौरान नियम-कानून को ताक पर रखकर निर्माण कार्य तेजी से बढ़े। स्थानीय प्रशासन या तो चुप रहा या मिलीभगत में शामिल दिखा। पूर्ववर्ती जनता दल, सपा और बसपा सरकारों ने भी इन अवैध निर्माणों को नजरअंदाज किया, कई मामलों में अप्रत्यक्ष संरक्षण दिया। परिणामस्वरूप, आवासीय जोन पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों में तब्दील हो गया।

    आज वही सपा नेता योगी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और व्यापारियों के बीच प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि समस्या की असली जड़ उनके कुशासन और भ्रष्टाचार में छिपी है। सपा के समय में जनहित याचिकाओं और आरटीआई के माध्यम से उठाए गए मुद्दों को दबाया जाता रहा, जिससे मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

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    योगी सरकार का प्रयास और तीन विकल्प
    योगी आदित्यनाथ सरकार ने शुरू से ही इस मुद्दे को संवेदनशीलता से हैंडल किया। मुख्यमंत्री योगी ने प्रभावित व्यापारियों से मुलाकात कर तीन व्यावहारिक विकल्प प्रस्तुत किए थे।

    पहला विकल्प: सरकार के साथ पक्षकार बनकर न्यायालय में मजबूत लड़ाई लड़ना।

    दूसरा विकल्प: आवास विकास विभाग के निर्धारित कंपाउंडिंग शुल्क जमा कर नियमितीकरण का रास्ता अपनाना।

    तीसरा विकल्प: सुप्रीम कोर्ट के संभावित रुख को देखते हुए बाजार छोड़कर सरकार की पुनर्वास योजना स्वीकार करना, जिसमें राज्य सरकार पूर्ण जिम्मेदारी लेने को तैयार थी।

    इन विकल्पों पर सहमति नहीं बन सकी। व्यापारियों और अन्य पक्षों में मतभेद रहे, जिससे मामला पूरी तरह अदालत पर निर्भर हो गया।

    सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और योगी सरकार की मजबूरी
    सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार “रूल ऑफ लॉ” पर जोर देते हुए अवैध निर्माण हटाने और सेटबैक क्षेत्र साफ करने का आदेश दिया। अदालत ने अधिकारियों को फटकार लगाई जब उन्होंने 'जन आक्रोश' या मास्टर प्लान संशोधन के बहाने कार्रवाई रोकी। 2025-2026 में सुनवाइयों के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माण कितने भी पुराने हों, उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।

    ऐसे में योगी सरकार के सामने कानूनी आदेश का पालन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह कानून का सम्मान करती है, लेकिन प्रभावित व्यापारियों को अधिकतम राहत देने के लिए प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर हर संभव प्रयास जारी रखे हुए है। सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अब अनिवार्य हो गई है।

    भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा ढांचा टिक नहीं सकता
    यह पूरा प्रकरण कानून के शासन की जीत है, लेकिन साथ ही पूर्ववर्ती सरकारों के कुशासन का दर्दनाक उदाहरण भी। सपा जैसे दलों के भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण ने एक पूरा बाजार अवैध बना दिया, जिसका बोझ आज योगी सरकार को उठाना पड़ रहा है।

    सरकार की चुनौती अब प्रभावितों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को कम करने की है, ताकि मेरठ का यह क्षेत्र पुनः कानूनी ढांचे के अनुरूप विकसित हो सके। योगी सरकार का रुख साफ है—कानून सर्वोपरि, लेकिन जनहित की उपेक्षा नहीं।

    सपा के कुशासन की देन को सुधारने का यह कठिन लेकिन आवश्यक कदम है, जो भविष्य के लिए सबक देता है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर खड़े किसी भी ढांचे का अंत आखिरकार कानूनी कार्रवाई से ही होता है।

    (लेखक इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में वकील हैं। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर निरंतर लेखन करते हैं।)