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ओडिशा में इंसानियत शर्मसार: बहला-फुसलाकर नाबालिग से रचाई शादी, 16 की उम्र में बनी मां; 30 वर्षीय पति गिरफ्तार

Published: Sun, 28 Jun 2026 09:20 AM (IST)

ओडिशा के जाजपुर में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसके बाद 30 वर्षीय आरोपी पति को गिरफ्तार किया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. नाबालिग लड़की ने धर्मशाला सीएचसी में बच्ची को जन्म दिया।

  2. 30 वर्षीय आरोपी पति पॉक्सो और बाल विवाह कानून में गिरफ्तार।

  3. ओडिशा में बाल विवाह गंभीर सामाजिक चुनौती, 20.5% लड़कियां प्रभावित।

जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के जाजपुर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। धर्मशाला क्षेत्र में 30 वर्षीय युवक ने न केवल एक नाबालिग लड़की से अवैध विवाह किया, बल्कि उसे कम उम्र में ही मातृत्व के बोझ तले भी धकेल दिया।

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब महज 16 वर्षीय पीड़िता ने धर्मशाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल प्रशासन की सतर्कता के बाद पुलिस हरकत में आई और शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता तथा आरोपी की पहचान कानून के तहत गोपनीय रखी गई है।

अस्पताल में खुली परतें, बालिगारी गांव में रह रहा था आरोपी

पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले वर्ष नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था और जाजपुर के बालिगारी गांव में उसके घर पर ही रह रहा था। सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर पीड़िता को धर्मशाला सीएचसी लाया गया। डॉक्टरों ने उसकी उम्र देख तत्काल जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू) और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ।

पॉक्सो, बीएनएस और बाल विवाह निषेध कानून के तहत केस

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो अधिनियम तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच का दायरा बढ़ाया गया है। यदि जांच में दोनों परिवारों अथवा अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी।

आंकड़े बताते हैं भयावह तस्वीर

यह घटना अकेली नहीं है। उपलब्ध सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ओडिशा में बाल विवाह अब भी गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है।

  • राज्य में 20.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले हो जाती है।
  • 7.6 प्रतिशत किशोरियां कम उम्र में ही गर्भधारण करती हैं।
  • 12 जिलों में बाल विवाह की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी अधिक चिंताजनक है।
  • नबरंगपुर (39.4%), नयागढ़ (35.7%) और कोरापुट (35.5%) सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
  • प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद हर वर्ष बड़ी संख्या में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं, जिनमें अनेक घटनाएं दर्ज भी नहीं हो पातीं।

जाजपुर की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है। जिस उम्र में एक बच्ची के हाथों में किताबें और सपने होने चाहिए, उसी उम्र में उसे मां बनने की पीड़ा झेलनी पड़ी।

कानून तभी प्रभावी होगा जब समाज भी बाल विवाह को अपराध मानकर उसका विरोध करेगा। बेटी बचाने का संदेश केवल सरकारी अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव में सामाजिक चेतना का हिस्सा बने।

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