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भारत को 10 महीने पहले ही मिली आजादी, क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?

Updated: Fri, 14 Aug 2026 06:54 PM (IST)

Independence Day 2026 : भारत को जून 1948 में मिलने वाली आजादी 10 महीने पहले 15 अगस्त 1947 को कैसे मिल गई, आइए जानते हैं।

Independence day 2026 10 महीने पहले भारत को कैसे मिली आजादी? (जागरण)

Independence day 2026 10 महीने पहले भारत को कैसे मिली आजादी? (जागरण)

HighLights

  1. ब्रिटिशर्स ने जून 1948 तक भारत छोड़ने की समय-सीमा तय की थी

  2. लॉर्ड माउंटबेटन ने 15 अगस्त 1947 को आजादी की तारीख चुनी

  3. सांप्रदायिक हिंसा व राजनीतिक गतिरोध ने जल्दी सत्ता हस्तांतरण कराया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्त को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रिटिशर्स ने भारत से निकलने के लिए जून 1948 की समय-सीमा तय की थी।

जून 1948 में मिलने वाली आजादी 10 महीने पहले 15 अगस्त, 1947 को ही कैसे मिल गई, आइए इतिहास के उस पन्ने के बारे में जानते हैं।

क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?

15 अगस्त की यह तारीख आखिरी वायसराय लॉर्ड लुइस माउंटबेटन ने शायद अचानक इसलिए चुनी ताकि वे युद्ध के समय की अपनी जीत को एक नए देश के जन्म के साथ जोड़ सकें।

1947 की शुरुआत तक, भारत में ब्रिटिश शासन कमजोर पड़ रहा था और सत्ता के हस्तांतरण पर ब्रिटिश प्रस्ताव 1946 के कैबिनेट मिशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता कराने में विफल रहा था।

16 अगस्त 1946 को मुहम्मद अली जिन्ना ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' का आह्वान किया, जो मुस्लिम लीग की अलग पाकिस्तान की मांग पर जोर देने के लिए एक लामबंदी थी। इस मांग ने कलकत्ता में सांप्रदायिक हिंसा भड़का दी, जो पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के नोआखाली, फिर बिहार और मार्च 1947 तक पंजाब के कुछ हिस्सों में फैल गई।

लंदन के साथ मतभेद होने के बावजूद, वायसराय लॉर्ड वेवेल स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली पर भारत से निकलने की एक पक्की तारीख तय करने का दबाव डालने लगे।

लॉर्ड वेवेल का आकस्मिक प्रस्ताव, जिसे 'ब्रेकडाउन प्लान' कहा जाता था और जिसमें चरणबद्ध तरीके से ब्रिटिश वापसी की बात कही गई थी, उसे जनवरी 1947 की शुरुआत में औपनिवेशिक शासकों की भारत और बर्मा समिति ने खारिज कर दिया था। साथ ही प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली की सरकार ने फैसला किया कि भारत में अब एक नए वायसराय की जरूरत है।

15 August 1947 (1)

लॉर्ड माउंटबेटन को बनाया नया वायसराय

यूके के संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक, 20 फरवरी 1947 को एटली ने हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया, 'ब्रिटेन जून 1948 से पहले की किसी तारीख तक जिम्मेदार भारतीय हाथों में सत्ता सौंप देगा।' 

एटली ने सत्ता हस्तांतरण की शर्तों पर बातचीत करने के लिए लॉर्ड वेवेल की जगह लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को नियुक्त किया।

माउंटबेटन 22 मार्च 1947 को लंदन से सत्ता सौंपने के निर्देश लेकर दिल्ली पहुंचे और दो दिन बाद मुख्य न्यायाधीश सर पैट्रिक स्पेंस ने उन्हें वायसराय के रूप में शपथ दिलाई।

पांच महीने में भारत से चले गए ब्रिटिशर्स

कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ हफ्तों की बातचीत के बाद, माउंटबेटन ने 3 जून 1947 को बंटवारे का अपना प्लान पेश किया।

माउंटबेटन के प्लान में नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी, जिससे यह पता लगाया जा सके, कौन सा राज्य किस देश में शामिल होगा। कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने माउंटबेटन के इस प्लान को मान लिया।

  • भारत और पाकिस्तान बनाने
  • पंजाब और बंगाल का बंटवारा करने

10 महीने पहले मिल गई आजादी

माउंटबेटन के 3 जून को प्रस्तावित प्लान की खास बात यह थी कि इससे भारत सत्ता सौंपने की तारीख 10 महीने पहले हो गई।

  • माउंटबेटन का मानना था कि ब्रिटिश शासन को और लंबा खींचने से उपमहाद्वीप पर नियंत्रण रखना और मुश्किल हो जाएगा।
  • कांग्रेस और मुस्लिम लीग, दोनों ही पार्टियां बातचीत करके थक चुकी थीं और जल्द सत्ता हस्तांतरण चाहती थीं।

माउंटबेटन का आकलन था कि जल्दी अलग होने से दोनों पक्षों के पास तय हो चुके मुद्दों को फिर से उठाने या प्रशासनिक बंटवारे के दौरान हिंसा के और फैलने की गुंजाइश कम होगी।

15 August 1947 (2)

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