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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Nimisha Priya: बेटी, ब्लड मनी और बेबसी... यमन में भारतीय नर्स को मिला मृत्युदंड, मां लगा रही मदद की गुहार; पढ़ें पूरा मामला

    By Jagran NewsEdited By: Shalini Kumari
    Updated: Fri, 17 Nov 2023 03:44 PM (IST)

    2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या करने के बाद कोर्ट ने निमिषा प्रिया को मृत्युदंड दिया है। अब उनकी मां ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि अप ...और पढ़ें

    निमिषा के साथ उनकी सहकर्मी को भी हुई सजा
    निमिषा के साथ उनकी सहकर्मी को भी हुई सजा

    HighLights

    1. निमिषा के साथ उनकी सहकर्मी को भी हुई सजा
    2. यमन के नागरिक पर निर्भर है मामले का फैसला
    3. दिल्ली हाई कोर्ट ने निमिषा की मां को यमन भेजने के लिए केंद्र से मांगा जवाब

    ऑनलाइन डेस्क, नई दिल्ली। यमन के सुप्रीम कोर्ट ने केरल की एक भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा के खिलाफ दाखिल याचिका को 13 नवंबर को खारिज कर दिया है।  दरअसल, निमिषा को एक यमनी नागरिक की हत्या के आरोप में 2017 से देश में कैद किया है।

    सरकार ने गुरुवार को उच्च न्यायालय को बताया कि अंतिम निर्णय अब यमन के राष्ट्रपति पर निर्भर है। निमिषा प्रिया की मां की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है।

    • निमिषा प्रिया को यमन नागरिक तलाल अब्दो महदी के कब्जे से अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए उसे नशीला इंजेक्शन लगाया था। हालांकि, ओवरडोज होने के कारण उसकी मौत हो गई, जिसके बाद निमिषा को 2018 हत्या का दोषी बता दिया गया।
    • निमिषा की उसकी सहकर्मी हनान, जो खुद एक यामिनी नागरिक है, उसने भी निमिषा की मदद की थी। दरअसल, महादी के शव को पानी की टंकी में फेंकने से पहले उसके शरीर के टुकड़े किए गए थे। जिसके बाद हनान को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
    • प्रिया की मां ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया और भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा प्रतिबंध के बावजूद यमन की यात्रा करने की अनुमति मांगी और अपनी बेटी को बचाने के लिए ब्लड मनी पर बातचीत की। मालूम हो कि किसी अपराधी या उसके परिवार द्वारा पीड़ित के परिजनों को दी गई राशि को ब्लड मनी कहा जाता है।
    • दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र से निमिषा की मां के यमन जाने के अनुरोध पर एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का आग्रह किया। निमिषा की मां ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अरब राष्ट्र में चल रहे गृहयुद्ध के कारण 2017 से भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा प्रतिबंध के बावजूद यमन की यात्रा करने की अनुमति मांगी।
    • वकील सुभाष चंद्रन केआर द्वारा प्रस्तुत याचिकाकर्ता ने पहले अदालत से अनुरोध किया था कि उनकी बेटी को बचाने का एकमात्र तरीका है कि पीड़ित परिवार को उससे संपर्क करने दिया जाए।
    • गुरुवार को, केंद्र के वकील ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत, यमन के लिए यात्रा प्रतिबंध में ढील दी जा सकती है, जिससे भारतीय नागरिकों को विशिष्ट कारणों और सीमित अवधि के लिए देश की यात्रा करने की अनुमति मिल सकती है।
    • उच्च न्यायालय ने पहले केंद्र को महिला को बचाने के लिए ब्लड मनी के भुगतान पर बातचीत करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था, लेकिन यमन में सजा के खिलाफ कानूनी उपाय अपनाने को कहा था।
    • पहले की याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि मृतक महदी ने यह दिखाने के लिए जाली दस्तावेज बनवाए थे कि उसने निमिषा से शादी की थी और उसके साथ दुर्व्यवहार कर उसे मानसिक रूप से परेशान किया था। 

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