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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Waqf Act को लेकर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, अधिनियम 1995 को दी गई है चुनौती

    By Agency Edited By: Mahen Khanna
    Updated: Tue, 27 May 2025 01:51 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 1995 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख ...और पढ़ें

    वक्फ अधिनियम को लेकर हुई सुनवाई। (फोटो- जागरण ग्राफिक्स)
    वक्फ अधिनियम को लेकर हुई सुनवाई। (फोटो- जागरण ग्राफिक्स)

    HighLights

    1. SC ने याचिका को 1995 के वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं से जोड़ा।
    2. याचिकाकर्ता ने वक्फ अधिनियम 1995 भेदभावपूर्ण बताया।

    एएनआई, नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को लेकर आज फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित वक्फ अधिनियम 1995 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ इस याचिका को 1995 के वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।

    सीजेआई ने देरी पर उठाए सवाल

    • सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने ये नोटिस दिया। पीठ निखिल उपाध्याय द्वारा 1995 अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
    • सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी उपाध्याय से पूछा कि 1995 अधिनियम को अब क्यों चुनौती दी जा रही है।
    • इसपर वकील ने कहा कि हम 2013 के संशोधन को भी चुनौती दे रहे हैं। इसके बाद सीजेआई ने कहा कि इसमें भी 12 साल हो गए। हम देरी की वजह से केस खारिज कर देंगे।

    जवाब देते हुए वकील उपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही 2020-21 में पूजा स्थल अधिनियम 1991 और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

    याचिकाकर्ता ने दी ये दलील

    बता दें कि याचिकाकर्ता ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 द्वारा संशोधित वक्फ अधिनियम 1995 की कई धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 27 के विरुद्ध हैं।

    याचिकाकर्ता ने ये भी तर्क दिया कि केवल मुसलमानों के पास ही उनकी धार्मिक संपत्तियों को संभालने से संबंधित कानून है और अन्य धर्मों के पास ऐसा कोई कानून नहीं है। इसलिए यह तर्क दिया गया कि वक्फ अधिनियम 1995 भेदभावपूर्ण था।

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