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    स्वतंत्रता दिवस 2026: पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा 'वंदे मातरम्'

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 06:08 PM (IST)

    स्वतंत्रता दिवस 2026 पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम्' गाया जाएगा, जिसकी अगुवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। ...और पढ़ें

    पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा 'वंदे मातरम्'। (फाइल)

    पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा 'वंदे मातरम्'। (फाइल)

    HighLights

    1. स्वतंत्रता दिवस 2026 पर लाल किले से पहली बार गूंजेगा 'वंदे मातरम्'।

    2. प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे।

    3. राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा मिला।

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अस्सी साल पहले तक भारतीय क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस राष्ट्रीय गीत को प्राण-प्रण से गाकर भारत को आजाद कराया था, उसी वंदेमातरम् की गूंज भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले पर पहली बार सुनाई देगी।

    रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बयान जारी कर कहा है कि 2026 में 'वंदेमातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह राष्ट्रीय गीत पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा, जो इसकी स्थायी विरासत को नमन होगा। यह स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत में गाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, फिर राष्ट्रगान गाया जाएगा और अंत में प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

    हाल ही में मोदी सरकार ने संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो वंदेमातरम् को अपमान के कृत्यों से कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी स्थिति में रखता है।

    इस विधेयक ने लोकसभा में राजनीतिक बहस को जन्म दिया, जिसमें द्रमुक ने इसका विरोध किया और सरकार पर राष्ट्रीय गीत के जरिये "देश को विभाजित" करने का आरोप लगाया। हालांकि, भाजपा ने संशोधन का बचाव कर कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि भारतीय नागरिक बिना किसी बाधा के वंदेमातरम् के प्रति सम्मान प्रकट कर सकें।

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    अमर गीत का इतिहास

    'वंदेमातरम्' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर, 1875 को लिखा था और यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का एक महान स्रोत रहा है। इस अमर गीत की रचना संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में की गई थी। यह गीत सबसे पहले 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास में यह गीत एक संन्यासी ने गाया है।

    समारोह का मुख्य विषय 'युवा शक्ति'

    15 अगस्त को इस वर्ष के स्वतंत्रता समारोह का ध्यान युवा शक्ति पर केंद्रित होगा, जो भारत की युवा जनसंख्या के योगदान को उजागर करेगा, जो 2047 तक एक विकसित भारत बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण है।

    रक्षा सचिव आरके सिंह ने बताया कि समारोह में युवाओं की सफलता और योगदान का जश्न मनाने की योजना "जंतर-मंतर पर प्रदर्शन" से पहले की है। युवाओं का हमारे विकसित भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण स्थान है।

    राहुल गांधी का प्रोटोकॉल

    रक्षा सचिव सिंह ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है और आमंत्रितों के लिए बैठने की व्यवस्था सख्ती से प्रोटोकाल के अनुसार की जाएगी।

    सिंह ने कहा कि प्रोटोकाल के अनुसार, राहुल गांधी की सीट कैबिनेट मंत्रियों के बाद होगी। ध्यान रहे कि पिछले समारोह में उन्हें प्रोटोकाल के तहत सातवीं पंक्ति में बैठे जाने को लेकर भारी विवाद हुआ था।

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