'वंदे मातरम्' के अनादर को रोकने वाला विधेयक राज्यसभा से पास, गुरुवार को लोकसभा में होगा पेश
राज्यसभा ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के अनादर को रोकने वाला विधेयक पारित कर दिया है, जिसे अब लोकसभा में पेश किया जाएगा। ...और पढ़ें
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वंदे मातरम् अनादर रोकने वाला विधेयक राज्यसभा में पारित

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के अनादर को रोकने वाला विधेयक बुधवार को राज्यसभा से पारित हो गया। जो अब गुरुवार को लोकसभा में पेश होगा। इस विधेयक के तहत अब वंदे मातरम् को भी जन-गण-मन जैसा ही सम्मान मिलेगा।
वहीं जानबूझकर इसे गाने से रोकने या बाधा डालने को अपराध माना जाएगा। जिसमें तीन साल की सजा का भी प्रविधान किया गया है। वहीं विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित उसके सहयोगी दूसरे विपक्षी दलों ने पहले तो काफी देर तक हंगामा किया, बाद में वाकआउट कर गए।
वंदे मातरम् अनादर रोकने वाला विधेयक राज्यसभा में पारित
इस दौरान विधेयक पर राज्यसभा में करीब घंटे भर चर्चा हुई। जिसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बीजेडी की सुलता देव, शिवसेना से ज्योति नागनाथ, आरपीआइ से केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले आदि ने हिस्सा लिया।
वहीं चर्चा पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण विधेयक का सम्मान लेगा।
जिसमें जन-गण-मन को गाने से जानबूझकर रोकने व बाधा डालने पर सजा का प्रविधान है लेकिन इनमें राष्ट्रगीत के लिए वैसी सुरक्षा नहीं थी। इस संशोधन विधेयक के जरिए अब राष्ट्रगीत भी इसके दायरे में आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डा.राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वंदे मातरम् को राष्ट्रगान जन गण मन के बराबर सम्मान दिया जाएगा और उसका दर्जा भी उसके बराबर होगा।
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लेकिन बाद में 1971 में इसके गौरव को बनाए रखने के लिए जो कानून बनाया गया, उनमें राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज व संविधान को शामिल किया, लेकिन वंदे मातरम् को नहीं रखा गया।
अनादर करने पर तीन साल की सजा का प्रावधान
केंद्रीय मंत्री राय ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस को पहले से आपत्ति थी,जो आज भी दिख रही है। वह शुरु से तुष्टिकरण की राजनीति करते आ रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् के इस विरोध के पीछे मकसद भारत तेरे टुकड़े होने का नारा देने वालों को खुश करना है।
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में यह निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों एक साथ बजाए जाएं, तो वंदे मातरम् के सभी छह पद पहले गाए जाने चाहिए।