सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में चुनाव किए रद, 6 हफ्ते में फिर मतदान कराने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह फैसला ...और पढ़ें

पंजाब में दोबारा चुनाव कराने का आदेश। (फाइल फोटो।)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 वार्डों में चुनाव रद्द करने का आदेश दिया।
नामांकन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर बाधा डालने की रिपोर्ट के बाद फैसला।
पटियाला और मोगा के वार्डों में छह सप्ताह में फिर से चुनाव होंगे।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के 50 म्युनिसिपल वार्ड में नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। यह आदेश एक जांच आयोग की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान नॉमिनेशन प्रोसेस में बड़े पैमाने पर बाधा डाले जाने की बात कही गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने 50 वार्डों (पटियाला जिले के 28 और मोगा के 22) में हुए चुनावों को रद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश हाई कोर्ट की पूर्व जज निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले एक-सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने के बाद दिया।
आयोग की रिपोर्ट में क्या निकला?
स्थानीय निकाय चुनाव 21 दिसंबर, 2024 को हुए थे। आयोग की नियुक्ति 24 मार्च, 2025 को हुई थी और उसने 18 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। बेंच ने कहा कि आयोग की मुख्य खोज यह है कि नॉमिनेशन की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर रुकावटें डाली गईं। नॉमिनेशन पेपर छीन लिए गए, फाड़ दिए गए या नष्ट कर दिए गए और उम्मीदवारों के साथ मारपीट की गई, उन्हें हिरासत में लिया गया या धमकाया गया।
आगे कहा गया, हम इन सुझावों को मानते हैं और निर्देश देते हैं कि संबंधित 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराए जाएं। दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी की जानी चाहिए। बेंच ने 28 सितंबर के आदेश में ये बातें कहीं जिसे कल रात अपलोड किया गया था।
कपिल सिब्बल ने नहीं जताई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल की बात पर ध्यान दिया कि राज्य को आयोग के सुझावों पर कोई आपत्ति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि वे दोबारा चुनाव की प्रक्रिया में 'ऑब्जर्वर' के तौर पर काम करने के लिए हाई कोर्ट बार के कम से कम दो या तीन सीनियर सदस्यों को नामित करें।
बेंच ने कहा, "नॉमिनेशन फॉर्म भरने, उनकी जांच/जमा करने, चुनाव चिह्न आवंटित करने, वोटिंग आदि की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी इन ऑब्जर्वर की मौजूदगी में की जाएगी। रिकॉर्डिंग को ठीक से सुरक्षित रखा जाएगा और मॉनिटरिंग कमेटी को सौंप दिया जाएगा। पंजाब राज्य, नॉमिनेशन शुरू होने से पहले, चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों/कर्मचारियों की वार्ड-वार सूची मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपेगा। इसके अलावा, डीएसपी और उससे ऊपर के रैंक के ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों की सूची भी सौंपी जाएगी।"
पंजाब सरकार उठाएगी खर्च
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी अधिकारी सहित किसी भी व्यक्ति द्वारा दोबारा चुनाव प्रक्रिया में दखल या रुकावट डालने से जुड़ी कोई भी शिकायत मॉनिटरिंग कमेटी से की जा सकती है। मॉनिटरिंग कमिटी और ऑब्जर्वर को मिलने वाला मानदेय हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तय करेंगे। बेंच ने कहा, "मॉनिटरिंग कमिटी और ऑब्जर्वर के मानदेय और उससे जुड़े खर्च पंजाब सरकार उठाएगी। सरकार उन्हें जरूरी सेक्रेटेरियल, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिकल और सुरक्षा सहायता भी देगी।"
बेंच ने कहा कि दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को एक रिपोर्ट सौंपी जाए। बेंच ने कहा, "दोबारा चुनाव की प्रक्रिया तभी पूरी मानी जाएगी जब सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस इस बात से संतुष्ट हो जाएं कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से कराए गए थे।"
पटियाला नगर निकाय में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से नाराज या वे उम्मीदवार जिन्हें कथित तौर पर अपने नामांकन पत्र दाखिल करने की अनुमति नहीं दी गई थी, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचे। 10 जनवरी 2025 को हाई कोर्ट ने पटियाला नगर निगम में चुनाव कराने की अनुमति दे दी और कहा कि कुछ वार्डों में चुनाव टालने से कोई बाधा नहीं आएगी। इस आदेश से नाराज होकर उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
