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    ड्रग्स तस्करी मामलों की समयबद्ध जांच, स्पीडी ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:53 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने देश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट का नोटिस।

    सुप्रीम कोर्ट का नोटिस।

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी और नशे के दुरुपयोग पर चिंता जताई।

    2. एनडीपीएस एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्र-राज्यों को नोटिस।

    3. याचिका में समयबद्ध जांच, विशेष अदालतों की मांग की गई।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है और आखिरकार यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है।

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एनडीपीएस एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

    अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने याचिका में नशीले पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग से निपटने के लिए एक समान और समयबद्ध व्यवस्था की मांग की है। उन्होंने कहा कि नशे से जुड़े मामले लगातार गंभीर सामाजिक और कानून-व्यवस्था की चुनौती बन रहे हैं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने भी भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और गोल्डन क्रीसेंट तथा म्यांमार-अफगानिस्तान क्षेत्र में नशीले पदार्थों की स्थिति का संदर्भ दिया।

    याचिका में मादक पदार्थों की तलाशी, जब्ती और नमूने लेने के लिए देशभर में समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग की गई है। साथ ही फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट के लिए समयसीमा तय करने और हर जिले में विशेष अदालत गठित करने का सुझाव दिया गया है। जांच और सुनवाई भी समयबद्ध तरीके से पूरी करने की मांग है।

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    याचिका में तस्करी से जुड़े आरोपितों और उनके परिवार की संपत्तियों की मनी लांड्रिंग, बेनामी संपत्ति और अन्य संबंधित कानूनों के तहत जांच तथा अवैध संपत्ति की समयबद्ध जब्ती का भी प्रस्ताव है। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की डिजिटल रिकार्डिंग और वीडियोग्राफी की मांग भी की गई है।

    याचिका में नशे के आदी लोगों के इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत करने तथा तस्करों और वित्तीय मददगारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ व्यक्तिगत इस्तेमाल से जुड़े मामलों के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत भी बताई गई है।