सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पीईकेबी कोयला ब्लॉक में वन अधिकारों पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पीईकेबी कोयला ब्लॉक के पास सामुदायिक वन अधिकारों पर केंद्र, राज्य और आरआरवीयूएनएल से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पीईकेबी कोयला ब्लॉक पर मांगा जवाब।
सामुदायिक वन अधिकारों को लागू करने की मांग वाली याचिका।
खनन गतिविधियों पर फिलहाल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, छत्तीसगढ़ सरकार और राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) से एक याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें पर्सा ईस्ट और केटे बेसिन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉक के पास एक गांव के निवासियों के सामुदायिक वन अधिकारों को लागू करने की मांग की गई है।
छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन अधिकार स्थानीय आदिवासी समूहों और वनवासियों को अपने पारंपरिक वन भूमि की रक्षा, प्रबंधन और उपयोग के लिए कानूनी शक्ति प्रदान करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 'हसदेव अरन्या बचाओ संघर्ष समिति' (एचएबीएसएस) और अन्य छह लोगों की याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार, आरआरवीयूएनएल और सरगुजा के जिला स्तर वन अधिकार समिति (डीएलसी) को नोटिस जारी किया, जिसमें 21 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने समिति और अन्य द्वारा दायर अपील को खारिज किया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीशों जायमाल्या बागची और वी. मोहन की पीठ ने सोमवार को अपने निर्देश में कहा कि आरआरवीयूएनएल की ओर से पीईकेबी कोयला ब्लॉक में चल रही खनन गतिविधियों पर याचिका पर नोटिस जारी करने के कारण कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस पहलू की जांच से आरआरवीयूएनएल द्वारा उसके कैप्टिव कोयला ब्लाक में चल रही खनन गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
