विधायकों के विशेषाधिकार VS अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: SC में 6 अक्तूबर को 7 जजों की पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ 6 अक्टूबर से विधायकों के विधायी विशेषाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संबंध पर सुनवाई करेगी।

6 अक्तूबर को 7 जजों की पीठ करेगी सुनवाई। (एएनआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट 6 अक्टूबर से करेगा विशेषाधिकारों पर सुनवाई।
सात जजों की पीठ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर विचार करेगी।
मौलिक अधिकार बनाम विधायी विशेषाधिकारों का होगा निर्धारण।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सात जजों की संविधान पीठ छह अक्टूबर से विधायकों के विधायी विशेषाधिकारों के दायरे और अभिव्यक्ति की आजादी पर इसके असर से जुड़े प्रविधानों की व्याख्या पर सुनवाई शुरू करेगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया है कि यह सुनवाई संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 194(3) (विधायकों के विशेषाधिकार) के बीच के जटिल आपसी संबंधों की पड़ताल करेगी।
क्या मौलिक अधिकार विशेषाधिकारों से बड़े हैं?
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2003 का है, जब तमिलनाडु विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष के. कलिमुथु ने विशेषाधिकार हनन और अवमानना के आरोप में वरिष्ठ पत्रकार एन. रवि और अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ पत्रकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।
इस मामले में दो परस्पर विरोधी फैसले रहे हैं - एक फैसले के अनुसार मौलिक अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए, जबकि 1965 के एक अन्य फैसले में कहा गया था कि मौलिक अधिकार संसदीय विशेषाधिकारों के अधीन हैं। इसी अंतर्विरोध को दूर करने के लिए मामले को सात जजों की वृहद पीठ के पास भेजा गया था।
बिक्री कर पर अतिरिक्त उपकर का मामला 22 सितंबर से
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य विधानसभाओं द्वारा बिक्री कर पर अतिरिक्त उपकर लगाने की शक्ति से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला 22 सितंबर से दोपहर दो से चार बजे के बीच सुना जाएगा।
कोर्ट की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि न्यायपालिका संवैधानिक महत्व के इन पेचीदा विषयों पर एक स्पष्ट, अंतिम और आधिकारिक व्याख्या तय करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
