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CEC के खिलाफ याचिकाओं पर SC के नोटिस से गरमाई सियासत, BJP बोली- लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ रहा देश

Published: Mon, 05 Oct 2026 04:47 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिकाओं पर चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस जारी ...और पढ़ें

CEC के खिलाफ याचिकाओं पर SC के नोटिस से गरमाई सियासत।

CEC के खिलाफ याचिकाओं पर SC के नोटिस से गरमाई सियासत।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने पर नोटिस दिया।

  2. BJP ने इसे स्वतंत्र संस्थाओं और लोकतंत्र का प्रमाण बताया।

  3. संबित पात्रा ने कहा, देश लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ रहा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भाजपा ने सोमवार को कहा कि चुनाव आयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस भेजना इस बात का सबूत है कि देश की सभी संस्थाएं आजादी से काम कर रही हैं और कहीं भी डर और तानाशाही का माहौल नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "देश बहुत लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ रहा है। हर कोई खुलकर अपनी बात कह रहा है। सभी प्रक्रियाओं और सिस्टम का पालन किया जा रहा है। लोकतंत्र का इससे बेहतर माडल और क्या हो सकता है। मुझे लगता है कि भारत लोकतंत्र का जश्न मना रहा है।"

सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें सीईसी ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जो कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना लिया गया था।

प्रक्रिया वैसे ही चल रही है जैसे इसे चलना चाहिए- पात्रा

पात्रा ने यहां पार्टी मुख्यालय में कहा, "सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करना, कोर्ट का सुनवाई करना और दूसरी पार्टी की बात सुनने के लिए नोटिस जारी करना, यह एक सामान्य प्रक्रिया है। यह लोकतांत्रिक और न्यायिक, दोनों तरह की प्रक्रिया है। जाहिर है, यह प्रक्रिया वैसे ही चल रही है जैसे इसे चलना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि एसआईआर पर अपने पत्रों में दो चुनाव आयुक्तों का अलग-अलग विचार रखना लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत है।

चर्चा करना और फिर आगे बढ़ना यही असल लोकतंत्र- पात्रा

उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में चिट्ठियों के जरिए मुद्दे उठाना, किसी प्रक्रिया पर सवाल करना, आम सहमति बनाने के लिए बहस और चर्चा करना और फिर आगे बढ़ना, असल में लोकतंत्र यही है। आप बहस और चर्चा करते हैं और फिर किसी फैसले पर पहुंचते हैं। लोकतंत्र का सार यही है।"

पात्रा ने कहा कि पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया और शीर्ष अदालत ने नोटिस जारी किए, यह भी लोकतंत्र का काम करने का तरीका ही है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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