किसानों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर बढ़ाया मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजे की दर समान रखने का सिद्धांत दोहराया है। ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष शक्तियों का प्रयोग कर किसानों का मुआवजा बढ़ाया

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माला दीक्षित, जागरण, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि एक ही अधिसूचना के तहत अधिग्रहित भूमि के मामलों में मुआवजे की दर समान रहनी चाहिए। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने कर्नाटक के भूस्वामी किसानों के साथ पूर्ण न्याय करने के लिए संविधान के अनुच्छेद-142 में मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर मुआवजा बढ़ाया है।
शीर्ष अदालत ने अपीलकर्ता भूस्वामी किसानों को वही मुआवजा देने का आदेश दिया, जो इसी अधिसूचना से जुड़े अन्य मामलों में पहले ही निर्धारित किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने विशेषाधिकारों का किया इस्तेमाल
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सात अगस्त को कर्नाटक के भू अधिग्रहण मामले में दिए फैसले में दर्ज किया कि संबंधित अधिसूचना के मामलों में वैधानिक लाभों सहित मुआवजा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया जा चुका है।
इस स्थिति में मुआवजे की उक्त दर अपीलकर्ता किसानों पर भी लागू होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने किसानों की ओर से अपील में अत्यधिक देरी किए जाने के बावजूद अनुच्छेद-142 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए उनका मुआवजा भी पांच लाख रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ करने का आदेश दिया।
हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अपीलकर्ता किसानों को देरी की अवधि का ब्याज नहीं मिलेगा।
हाईकोर्ट पहुंचे थे किसान, सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा मुआवजा
यह मामला 11 फरवरी, 1999 की अधिसूचना से जुड़ा है। इसके तहत कर्नाटक के बागलकोट जिले में भूमि का अधिग्रहण किया गया था। भूमि अधिग्रहण अधिकारी के अवार्ड के बाद संदर्भ न्यायालय ने 2001 में मुआवजा तीन लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया था।
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असंतुष्ट किसानों ने हाई कोर्ट का रुख किया और हाई कोर्ट ने इसे बढ़ाकर पांच लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया था। किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। उन्होंने उसी अधिसूचना से अधिग्रहित जमीन पर पहले 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दिए जाने का हवाला देते हुए उसी के समान मुआवजे की मांग की।
हालांकि भूमि अधिग्रहण अथॉरिटी और राज्य सरकार ने दलील दी कि किसानों ने अपील दाखिल करने में अत्यधिक देरी की थी। हाई कोर्ट ने इस देरी को असामान्य माना था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि इसी अधिसूचना से जुड़े अन्य मामलों में मुआवजा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
नहीं मिलेगा ब्याज
अपीलकर्ताओं ने इसी आधार पर समान मुआवजे की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह दर्ज किया कि जब समान अधिसूचना के मामलों में 6.5 लाख रुपये की दर पहले ही लागू हो चुकी है, तो उसे अपीलकर्ताओं पर भी लागू किया जा सकता है।
हाई कोर्ट में अपील करने में 2383 दिन और फिर सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने में 2044 दिन की देरी यानी कुल 4427 दिन की देरी हुई थी, इसलिए इस अवधि का ब्याज नहीं मिलेगा।