यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
500 और 1000 के नोट पर प्रतिबंध के लिए पीएम ने बनाया था ये मास्टर प्लान
कालाधन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए करेंसी नोट पर पाबंदी का फैसला पूरी तरह गुप्त था। केंद्रीय मंत्रियों तक को इसकी जानकारी अंतिम वक्त में दी गई।

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। मंगलवार को जिस तरह सरकार ने अचानक से 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया उससे निश्चित तौर पर पूरे देश में हलचल पैदा हो गई। लोगों ने आनन-फानन में एटीएम के बाहर 100 रूपये के नोट के लिए लाइन लगानी शुरू कर दी, अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग सवाल उठाने लगे कि इस तरह का फैसला क्यों लिया गया? आपको बता दें कि ये सबकुछ अचानक नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इसकी तैयारी 6 महीने पहले से की जा रही थी। इस पूरी प्रक्रिया को टॉप सीक्रेट रखा गया, यहां तक की पीएम मोदी के संबोधन से कुछ ही देर पहले कैबिनेट को इस बारे में जानकारी दी गई।
कैबिनेट मंत्रियों को भी नहीं थी इतने बड़े परिवर्तन की भनक
सूत्रों के मुताबिक जबतक पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम दिए संबोधन में नोट पर प्रतिबंध का फैसला नहीं सुना दिया तबतक कैबिनेट मंत्रियों को उस कक्ष से बाहर निकलने की इजाजत नहीं दी गई साथ ही उनके मोबाइल फोन तक उनसे दूर रखे गए। इसके अलावा जिन अधिकरियों को 500 और 1000 के नोट बंद करने को लेकर पेपर वर्क करना था, उनपर भी सख्त निगरानी रखी गई।
लंबे समय से काले धन को लेकर हिदायत दे रहे थे पीएम
कालाधन के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए करेंसी नोट पर पाबंदी का फैसला भले ही पूरी तरह गुप्त था। केंद्रीय मंत्रियों तक को इसकी जानकारी अंतिम वक्त में दी गई। लेकिन आम जनता को हिदायत तो लंबे अर्से से दी जा रही थी। सच्चाई यह है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच महीने पहले यह स्पष्ट चेतावनी दी थी कि स्वत: कालाधन घोषित न करने वाले लोग बाद में शिकायत न करें और न ही पैरवी। उसके बाद भी दो तीन मौकों पर उन्होंने संकेत दे दिया था कि वह कालाधन को लेकर बड़ी कार्रवाई करने वाले हैं। आखिरी बार तो एक पखवाड़े पहले ही उन्होंने काला धन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की बात की थी।
कई बार लोगों को आगाह कर चुके थे पीएम
दैनिक जागरण ने 15 जून को ही जानकारी दी थी कि मोदी ने खरे खरे शब्दों मे कह दिया है कि कालाधन पर दोबारा मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने बंद कमरे में इलाहाबाद में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि अपने दोस्त -यारों तक भी संदेश पहुंचा दें कि 30 सितंबर को स्वैच्छिक घोषणा योजना खत्म होने के बाद मुरव्वत नहीं होगी। दोबारा 23 जून को एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने आगाह किया था कि 30 सितंबर से पहले पहले अघोषित संपत्ति की घोषणा कर दें। यह खुले मंच से कहा गया था लेकिन लोगों के कान पर जूं न रेंगा। आखिरी बार 22 अक्टूबर को वडोदरा में दिव्यांगों के एक कार्यक्रम में भी मोदी ने संकेत दे दिया था कि उनके मन में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा था- 'एक लाख करोड़ काला धन बाहर आ चुका है। सोचो कि अगर काला धन के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक होता तो क्या निकलता?' 30 सितंबर बीतने के सवा महीने के अंदर ही उन्होंने सर्जिकल कर दी।
6 महीने पहले से तैयारी कर रहा था RBI
इस पूरे क्रम में हालांकि रिजर्व बैक और सरकार के स्तर से छह महीने से तैयारी चल रही थी लेकिन शीर्ष स्तर पर गिने चुने लोगों के अलावा किसी को कानों कान खबर नहीं थी। केंद्रीय मंत्रियों को सार्वजनिक घोषणा से आधे घंटे पहले ही इसकी जानकारी मिली। बताते हैं कि केंद्रीय कैबिनेट के एजेंडे में इसकी जानकारी नहीं थी। हां, मंत्रियों को यह जरूर सूचित कर दिया गया था कि फोन लेकर बैठक में न आएं। यह लिखित रूप में भी था और मंगलवार की दोपहर को मंत्रियों के कार्यालय में फोन कर भी सूचित किया गया था। बंद कमरे में प्रधानमंत्री ने उन्हें जानकारी दी कि 500 और 1000 के करेंसी नोट बंद किए जा रहे हैं। बताया जाता है कि मंत्रियों ने देश के नाम प्रधानमंत्री का संबोधन भी वहीं देखा।

