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न मालगाड़ी रुकेगी, न लेट होंगी पैसेंजर ट्रेनें... फ्रेट नेटवर्क से बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:00 PM (IST)

प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा में पश्चिमी डीएफसी के अंतिम तीन सेक्शन राष्ट्र को समर्पित किए, जिससे देश को 2,843 किलोमीटर ...और पढ़ें

पीएम मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का किया उद्घाटन

पीएम मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का किया उद्घाटन

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अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। करीब दो दशक पहले शुरू हुई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) परियोजना अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां देश के लिए 2,843 किलोमीटर का अलग माल ढुलाई रेल नेटवर्क उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वडोदरा में पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम तीन सेक्शन राष्ट्र को समर्पित करते हुए इस उपलब्धि को तेजी से बदलते भारत की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव बताया।

इसका आशय है कि देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों और बंदरगाहों के बीच माल के लिए अब यात्री ट्रेनों से अलग रेल नेटवर्क उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री ने परियोजना के लंबे सफर की चर्चा करते हुए काम करने की बदलती संस्कृति से जोड़ा और कहा कि 22 साल पहले मंजूर हुई परियोजना के लिए 2006 में कारपोरेशन बनाया गया, लेकिन अब पूर्वी और पश्चिमी दोनों कॉरिडोर पूरे हो गए। पश्चिमी डीएफसी के तीनों सेक्शन की कुल लंबाई 326 किलोमीटर है और इन पर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।

यह उत्तर प्रदेश के दादरी से महाराष्ट्र के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) तक 1,506 किलोमीटर लंबा है। पूर्वी डीएफसी पंजाब के लुधियाना से बिहार के सोननगर तक 1,337 किलोमीटर है। दादरी में दोनों कॉरिडोर आपस में जुड़ते हैं।

इस तरह दोनों की कुल लंबाई 2,843 किलोमीटर है।

नए सेक्शन का बड़ा फायदा यह है कि दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों से जेएनपीए बंदरगाह तक माल के लिए पूरा समर्पित रेल रास्ता उपलब्ध हो गया है। अब बंदरगाह से गुजरने वाले कंटेनरों को यात्री रेल नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अभी तक एक ही पटरी पर यात्री ट्रेन और मालगाड़ी के चलने से यात्री ट्रेनों को तरजीह मिलती रही है।

डीएफसी में यह समस्या लगभग खत्म हो गई है, क्योंकि इसके ट्रैक सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनाए गए हैं। जाहिर है, इससे मालगाड़ियों की गति बढ़ेगी और समय कम लगेगा। दूसरी तरफ यात्री ट्रेनों के भी लेट-लतीफ होने का खतरा नहीं रहेगा।

पश्चिमी डीएफसी की विशेषता डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेन है। इसमें एक के ऊपर दूसरा कंटेनर रखा जाएगा। इससे एक ही ट्रेन में अधिक माल ले जाना संभव होगा, जिससे लागत में कमी आएगी। एक ट्रेन में अधिक कंटेनर जाने का मतलब है कि उतने ही माल के लिए कम फेरों की जरूरत पड़ेगी।

सड़क से रेल की ओर शिफ्ट होने पर ट्रकों की संख्या, ईंधन की खपत एवं सड़क पर दबाव भी घट सकता है। डीएफसी के जरिए फल, सब्जियां, फूल एवं अन्य कृषि उपज को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है। समय की भी बचत होगी।

सबसे बड़ा बदलाव है कि माल ढुलाई को अब सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के रूप में नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति शृंखला के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।

बंदरगाह, लाजिस्टिक हब, कारखाना और बाजार जब तेज रेल संपर्क से जुड़ते हैं तो इससे कारोबार के लिए समय और भंडारण लागत में कमी आती है।

डीएफसी का निर्माण पूरा होना पहला पड़ाव है। अब उपलब्ध क्षमता का इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती होगी। अधिक मालगाड़ियां चलाने, बंदरगाहों और मल्टीमाडल लाजिस्टिक्स पार्कों को जोड़ने तथा उद्योगों को इस नेटवर्क पर अधिक माल भेजने के लिए तैयार करने पर ही निवेश का पूरा आर्थिक लाभ मिलेगा।