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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 22, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा-पीडीपी में बनी बात, मुफ्ती होंगे जम्‍मू-कश्‍मीर के नए सीएम!

By Sumit KumarEdited By:
Updated: Sun, 22 Feb 2015 10:08 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन का खाका खींच लिया गया है। सरकार गठन को लेकर भाजपा और पीडीपी की खींचतान ‘तुम्हारी भी जय-जय हमारी भी जय’ में सिमट गई है। एक सप्ताह बाद मुंबई से जम्मू लौटे पीडीपी प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद ने संकेत दिए कि सरकार गठन को लेकर बात

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में सरकार गठन का खाका खींच लिया गया है। सरकार गठन को लेकर भाजपा और पीडीपी की खींचतान ‘तुम्हारी भी जय-जय हमारी भी जय’ में सिमट गई है। एक सप्ताह बाद मुंबई से जम्मू लौटे पीडीपी प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद सईद ने संकेत दिए कि सरकार गठन को लेकर बात बन गई है, औपचारिक एलान जल्द होने की उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक नई सरकार में मुफ्ती मोहम्मद सईद पूर्णकालिक मुख्यमंत्री होंगे। वह शुक्रवार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इस बीच सरकार गठन और मुफ्ती और मोदी मुलाकात के मद्देनजर महबूबा मुफ्ती रविवार को दिल्ली आएंगी।

इस बीच संविधान के अनुच्छेद 370, सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम (अफस्पा) व पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों की स्थिति जैसे कई विवादास्पद मुद्दों पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम की सहमति बन गई है। जानकारी के मुताबिक साझा कार्यक्रम के ड्राफ्ट में इन मुद्दों पर दोनों दलों को पीछे हटते दिखाने की जगह राज्य को विकास व तीनों क्षेत्रों को समान अवसर जैसे मुद्दों को ज्यादा तरजीह दी गई है।

जबकि, 370 के मुद्दे को लेकर भाजपा से लिखित आश्वासन मांग रही पीडीपी अब मौखिक आश्वासन पर मानती दिख रही है। ऐसे में अनुच्छेद 370 को लेकर साझा कार्यक्रम में राज्य सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करेगी, लिखा होगा।

गौरतलब है कि इस अनुच्छेद को लेकर राज्य में अलग-अलग राय है। वहीं, अफस्पा का मामला एक समिति के हवाले कर दिया जाएगा। भविष्य में इस समिति की सिफारिश पर धीरे-धीरे शांतिपूर्ण इलाकों से अफस्पा की विदाई होगी।

जबकि पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों के मुद्दे को मानवीय आधार पर निपटाने को लेकर सहमति बनी है।कुछ राजनीतिक मुद्दों को लेकर हमारे परंपरागत विचार अलग-अलग हैं। लेकिन, दोनों पार्टिया गंभीरता से बीच का रास्ता तलाश रही हैं।

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