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पैसिव स्मोकिंग के मामले में चीन के बाद भारत, 44 करोड़ लोग जद में

Published: Tue, 08 Sep 2026 12:12 PM (IST)

भारत में पैसिव स्मोकिंग से होने वाली मौतों में 1990 के बाद से लगभग 50% की वृद्धि हुई है, 2023 में 3.25 लाख से अधिक लोगों की जान गई।

पैसिव स्मोकिंग से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी(फोटो: रॉयटर्स)

पैसिव स्मोकिंग से होने वाली मौतों में लगातार बढ़ोतरी(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में सेकंड-हैंड स्मोकिंग यानी पैसिव स्मोकिंग से होने वाली मौतों में भारी उछाल आया है। 1990 के बाद से इन मौतों में लगभग 50% की वृद्धि हुई है, और अकेले 2023 में 3,25,600 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

सोमवार को द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 2023 में चीन के बाद भारत में सेकंड-हैंड स्मोकिंग के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या दुनिया में दूसरी सबसे अधिक थी, जिससे लगभग 44.4 करोड़ भारतीय प्रभावित हुए हैं।

एक्सपोजर दर घटी, लेकिन प्रभावितों की संख्या बढ़ी

पिछले तीन दशकों में भारत में आयु-मानकीकृत एक्सपोजर दर 43.2% से घटकर 30.6% हो गई है। हालांकि, आबादी बढ़ने के कारण इससे प्रभावित होने वाले लोगों की कुल संख्या 1990 में 37.5 करोड़ से बढ़कर 2023 में 44.4 करोड़ हो गई है, जो 18.4% की वृद्धि है।

इसके स्वास्थ्य परिणाम भी बेहद गंभीर रहे हैं; इसी अवधि के दौरान सेकंड-हैंड स्मोक के कारण होने वाली मौतें 2,17,700 से बढ़कर 3,25,600 हो गईं।

इस अवधि में सेकंड-हैंड स्मोकिंग के कारण महिलाओं की मृत्यु का आंकड़ा 1,13,400 से बढ़कर 1,56,900 हो गया, जबकि पुरुषों की मौतों का आंकड़ा 1,04,300 से बढ़कर 1,68,700 हो गया।

2023 में इसके कारण भारत में 92.8 लाख डिसेबिलिटी-एडजस्टेड लाइफ-ईयर्स का नुकसान हुआ। यह आंकड़ा समय से पहले होने वाली मौत, बीमारी या विकलांगता के कारण खोए हुए स्वस्थ वर्षों को दर्शाता है।

बच्चे और महिलाएं सबसे अधिक संवेदनशील

एक्सपर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि सेकंड-हैंड स्मोक न केवल बीमारी और विकलांगता का कारण बनता है, बल्कि यह समय से पहले मौत और स्वस्थ जीवन के वर्षों के नुकसान के लिए भी जिम्मेदार है।

बच्चे और महिलाएं इसके प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, जिससे उन्हें सांस संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धूम्रपान केवल खुले स्थानों पर किया जाना चाहिए और इसके प्रति जन जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है।

जानलेवा बीमारियों का खतरा और वैश्विक स्थिति

यह अध्ययन सेकंड-हैंड स्मोक को कई गंभीर बीमारियों से जोड़ता है, जिनमें इस्केमिक हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, स्तन कैंसर, टाइप 2 मधुमेह और अस्थमा शामिल हैं।

बच्चों में, इस बीमारी के बोझ का सबसे बड़ा कारण सांस के निचले हिस्से का संक्रमण पाया गया।

वैश्विक स्तर पर क्या है स्थिति?

वैश्विक स्तर पर, 2023 में लगभग 2.71 बिलियन लोग सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आए, जिससे 16.6 लाख मौतें हुईं और 4.48 करोड़ DALYs का नुकसान हुआ।

दुनिया की लगभग आधी प्रभावित आबादी चीन, भारत और इंडोनेशिया में रहती है, जिसमें चीन में सबसे अधिक 66.4 करोड़ लोग इसके संपर्क में हैं।

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