पाकिस्तान को झटका: सिंधु जल संधि स्थगन के बाद भारत की बड़ी पहल, चिनाब पर परियोजनाओं से बढ़ा नियंत्रण
पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के स्थगन के एक साल बाद भारत ने चिनाब नदी पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की हैं। इन पहलों से भारत का नदियों पर नियंत्र ...और पढ़ें

सिंधु जल संधि स्थगन के बाद भारत की बड़ी पहल (फाइल फोटो)
HighLights
सिंधु जल संधि स्थगन के बाद भारत की बड़ी पहल।
चिनाब नदी पर परियोजनाओं से भारत का जल नियंत्रण बढ़ा।
बिजली उत्पादन में वृद्धि, जम्मू-कश्मीर सहित राज्यों को लाभ।
नीलू रंजन, नई दिल्ली। पहलगाम में पाकिस्तान पोषित आतंकी घटना के तुरंत बाद भारत ने ¨सधु जल संधि के स्थगन के साथ पाकिस्तान को पहला सख्त संदेश दिया था। 1960 के समझौते के स्थगन के फैसले के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था। उस पहली कार्रवाई को एक साल हो चुके हैं।
उस वक्त यूं तो कईयों की ओर से संदेह जताया गया था लेकिन एक साल के अंदर ही ठोस पहल की शुरूआत यह संकेत है कि अगले कुछ वर्षों में यह फैसला आसपास के कई राज्यों के लिए मील का पत्थर साबित होगा और पाकिस्तान के सजा। उस वक्त सरकार की ओर से कहा गया था कि भारत अपनी नदियों का पहले पूरा इस्तेमाल देश के लिए करेगा।
इससे जम्मू-कश्मीर समेत पंजाब और राजस्थान तक पानी पहुंचाने की तैयारी शुरू हुई थी। बिजली उत्पादन शुरू करने की मंशा जताई थी। आज की स्थिति बताती है कि बदलाव शुरू हो चुके हैं। एक तरफ संयुक्त निगरानी और पाकिस्तान के दखल के बाद दशकों से रूकी परियोजनाओं का रास्ता हो गया है, वहीं मौजूदा बांधों की गाद की सफाई होने से उनकी भंडारण क्षमती बढ़ी, जिससे इस बार गर्मियों में भी ज्यादा बिजली का उत्पादन संभव हो पा रहा है।
क्या पूरी तरह नियंत्रित होगा नदियों का पानी?
नदियों के पानी को पूरी तरह से नियंत्रित करना फिलहाल संभव नहीं हैं, लेकिन किश्तवाड में सबसे ऊंचाई पर बनने वाली मेरूसुदार परियोजना के पूरा होने के बाद चिनाब के जल को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिल जाएगी। पाकिस्तान जाने वाले जल की मात्रा थोड़ी कम हो गई है। पर पूरी तरह से रूकी नहीं है। लेकिन इससे दो बड़े अंतर जरूर आ गए हैं।
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एक तो भारत ने नदियों के जल प्रवाह की पूर्व जानकारी पाकिस्तान को देना बंद कर दिया है। दूसरी, समझौते के कारण भारत की परियोजनाओं पर पाकिस्तान की ओर लगाए जा रहे अड़ंगे बंद हो गए हैं और उनमें तेजी आई है। पाकिस्तान अड़ंगा बंद होने की वजह से बैराजों में गाद की सफाई संभव हुई है और उनकी भंडारण क्षमता बढ़ी है। अब उनमें अपनी आवश्यकता के अनुसार पानी स्टोर कर रहे हैं और नियमित बिजली उत्पादन हो रहा है।
पहले गर्मियों में पानी का बहाव कम होने पर कुल क्षमता का 10-15 फीसद ही बिजली उत्पादन हो पाता था, जो अभी 60-70 फीसद तक हो रहा है। गौरतलब है कि यहां तीन पनबिजली केंद्र है जिनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता लगभग 1440 मेगा वाट है। चिनाब नदी पर दो बड़ी परियोजनाएं इसी वर्ष के अंत तक पूरी हो रही हैं। इनमें एक किश्तवाड के पक्कलडुल और दूसरी किरू पनबिजली परियोजना है।
इसके अलावा क्वार और अन्य परियोजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू हुआ है। इसी तरह से चिनाब की सहायक नदी मेरुसुदार पर पक्कलडुल परियोजना पर भी काम शुरू हुआ है। इसकी क्षमता अधिक है, जिसमें अतिरिक्त पानी का भंडारण किया जा सकेगा।
कैसे नियंत्रित होगी चिनाब की जलधारा
इसी तरह से मेरुसुदार पर बुरसर परियोजना के पूरा होने के बाद चिनाब की जलधारा को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा और दूसरी पनबिजली परियोजनाओं तक भी जरूरत पड़ने पर पानी पहुंचाया जा सकेगा।
इसी तरह सावलाकोट परियोजना को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है। यह परियोजना भी तकनीकी कारणों और पाकिस्तान के विरोध के कारण अटकी हुई थी। लेकिन कनाल बनाकर इन नदियों के पानी को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने वाली योजनाएं अभी तक ड्राइंगबोर्ड तक ही सीमित हैं।