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    'E20 पेट्रोल से कम हो सकता है माइलेज', संसद में बोले नितिन गडकरी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 07:29 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि 20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) से वाहनों का माइलेज 2-6% तक कम हो सकता है, जो वाहन की श्रेणी और उम ...और पढ़ें

    नितिन गडकरी ने बताए E20 पेट्रोल के फायदे (फोटो-पीटीआई)

    नितिन गडकरी ने बताए E20 पेट्रोल के फायदे (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. ई-20 पेट्रोल से माइलेज 2-6% तक घट सकता है।

    2. वैज्ञानिक परीक्षणों में इंजन खराब होने का कोई प्रमाण नहीं।

    3. ई-20 बेहतर एक्सेलेरेशन और कम कार्बन उत्सर्जन देता है।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) के इस्तेमाल से वाहनों की ईंधन दक्षता (माइलेज) में दो से छह प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। यह कमी वाहन की श्रेणी और उसकी उम्र पर निर्भर करेगी यानी वह कितना पुराना है।

    हालांकि, गडकरी ने स्पष्ट किया कि अब तक किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों में ई-20 के कारण इंजन खराब होने या किसी गंभीर तकनीकी खराबी का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

    गडकरी ने बताए E20 पेट्रोल के फायदे

    गडकरी ने एक लिखित उत्तर में बताया कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों में बेहतर एक्सेलेरेशन, स्मूथ ड्राइविंग अनुभव और ई-10 पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

    नितिन गडकरी ने बताया कि ई-20 के प्रभाव का अध्ययन आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआइ), सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) और इंडियन आयल कार्पोरेशन (आइओसीएल) ने संयुक्त रूप से किया।

    इस अध्ययन में बीएस-3, बीएस-4 और बीएस-6 मानकों वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर लैब और सड़क दोनों स्तरों पर परीक्षण किए गए। सभी परीक्षण वाहन निर्माताओं के सहयोग से निर्धारित मानकों के अनुसार किए गए।

    मंत्री ने कहा कि ई-20 पेट्रोल को लेकर विपक्ष और कुछ उपभोक्ता संगठनों ने पुराने वाहनों की अनुकूलता, कम माइलेज और संभावित रखरखाव लागत को लेकर सवाल उठाए हैं।

    सरकार का कहना है कि ई-20 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है और इसके पीछे व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण तथा तकनीकी संस्थानों की सलाह शामिल रही है।

    गडकरी के अनुसार, 2006 में ई-5 लागू किया गया और बाद के वर्षों में इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों से ई-19 और ई-20 पेट्रोल का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है।

    मंत्री ने दावा किया कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इन मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं, लेकिन एथनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन बंद पड़ने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई-20 के कारण असामान्य जंग, घिसावट या वाहन की आयु में कमी का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन निर्माता ई-20 उपयोग करने वाले ग्राहकों की वारंटी दे रहे हैं, इससे इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भरोसा बढ़ता है।

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    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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