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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजसी ठाठबाट के साथ त्रिशिका से विवाह बंधन में बंधे यदुवीर वाडयार

By Kamal VermaEdited By:
Updated: Mon, 27 Jun 2016 07:02 PM (IST)

मैसूर के अंबा विलास महल में आज वाडयार राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडयार और डूंगरपुर की राजकुमारी त्रिशिका कुमारी सिंह विवाह बंधन में बंध गए।

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मैसूर (प्रेट्र)। वाडयार राजपरिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडयार सोमवार को अंबा विलास महल में राजसी ठाठबाट के बीच पारंपरिक समारोह में त्रिशिका कुमारी सिंह के साथ विवाह बंधन में बंध गए। लगभग एक हजार मेहमानों की उपस्थिति में महल में विशेष रूप से सजाए गए 'कल्यान मंतप' में पुजारियों के समूह ने 'कर्कट लग्न' में इस विवाह को संपन्न कराया।

24 वर्षीय यदुवीर वाडयार राजवंश के 27वें राजा हैं। जबकि, त्रिशिका राजस्थान के डूंगरपुर राजपरिवार के हर्षवर्धन सिंह और महेश्री कुमारी की बेटी हैं। हर्षवर्धन सिंह हाल में राजस्थान से राज्यसभा सांसद चुने गए हैं।राजसी परंपराओं के मुताबिक शनिवार से ही शादी की रस्में जारी थीं। ये रस्में यदुवीर द्वारा 'राजगुरु' ब्रह्मतंत्र परकला मठ के अभिनव वागीश ब्रह्मतंत्र स्वतंत्र स्वामी की 'पद पूजा' से शुरू हुईं थीं।

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सोमवार सुबह विवाह रस्में यदुवीर की ओर से 'गणपति पूजा' और त्रिशिका की ओर से 'गौरी पूजा' करने के साथ शुरू हुईं। इसके बाद कन्यादान, वरमाला, मंगलया धराना (गठबंधन) और सप्तपदी (सात फेरे) की रस्में पूरी की गईं। विवाह समारोह में शीर्ष राजनेता, मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उनके कैबिनेट सहयोगियों, कई देशों के राजनयिकों और देशभर के राजघरानों को आमंत्रित किया गया था।

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राजपूत और मैसूर अंदाज में बांधी गई रंगबिरंगी पगडि़यों ने विवाह समारोह की भव्यता और बढ़ा दी थी। समारोह में मेहमानों को तरह-तरह के बेहद लजीज दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए। अब 28 जून को मैसूर और दो जुलाई को बेंगलुरु में रिसेप्शन का आयोजन भी किया जाएगा।

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वाडयार राजवंश के अंतिम वंशज दिवंगत श्रीकांतदत्त नरसिम्हराजा वाडयार की पत्नी प्रमोदा देवी वाडयार ने पिछले साल फरवरी में यदुवीर गोपाल राज उर्स को औपचारिक तौर पर गोद लिया था। इस दंपती के कोई संतान नहीं थी। गोद लिए जाने के बाद उनका नाम यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडयार हो गया। यदुवीर ने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र और अंग्रेजी में बीए किया है। राजपरिवार में गोद लिए जाने से काफी पहले ही यदुवीर की त्रिशिका से सगाई हो चुकी थी।

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पिछले साल 28 मई को एक पारंपरिक समारोह में यदुवीर को मैसूर राजघराने का उत्तराधिकारी बनाया गया था। इसके बाद दशहरे पर वह खास दरबार की अध्यक्षता करने के लिए स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हुए थे। वह मैसूर के अंतिम महाराज जयचामराजेन्द्र वाडयार की सबसे बड़ी पुत्री राजकुमारी गायत्री देवी के पोते हैं। वाडयार राजवंश ने मैसूर राज्य पर 1399 से 1947 तक राज किया था।

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राजघराने के अंतिम शासक के तौर पर जयचामराजेन्द्र वाडयार ने 1940 तक शासन किया। अंग्रेजों से स्वतंत्रता मिलने के बाद उन्होंने भारत का प्रभुत्व स्वीकार कर लिया और 1950 में भारत के गणराज्य बनने तक महाराजा बने रहे थे। कर्नाटक के पुराने मैसूर क्षेत्र के लोग वाडयार शासकों के समाज के प्रति किए गए योगदान को आज भी याद करते हैं।

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