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    परिसीमन बिल की गहमागहमी के बीच बुलाया गया संसद का मानसून सत्र, क्या सरकार के पास है पूर्ण बहुमत?

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:18 PM (IST)

    सरकार ने 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर राजनीतिक गहमागहमी तेज है। ...और पढ़ें

    मानसून सत्र 2026

    मानसून सत्र 2026

    HighLights

    1. संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा।

    2. सरकार परिसीमन बिल पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही।

    3. विपक्षी सांसदों के समर्थन से दो-तिहाई बहुमत जुटाने का प्रयास।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ करने के सियासी दांव-पेंच के बीच सरकार ने 20 जुलाई से 13 अगस्त के बीच संसद का मानसून सत्र बुलाने का एलान कर दिया है।

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले इस सत्र को लेकर राजनीतिक गहमागहमी पहले से ही शुरू हो गई है क्योंकि सरकार महिला आरक्षण तथा परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन बिल दुबारा लाने की तैयारी में जुटी हुई है।

    शिवसेना यूबीटी के नौ में से छह सांसदों के पाला बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने तथा तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों के टूट कर अलग गुट बनाने तथा भाजपा-एनडीए सरकार का समर्थन करने के एलान के बाद मानसून सत्र में नए सिरे से परिसीमन बिल लाए जाने की चर्चाएं गरम है।

    परिसीमन बिल पास कराने की कोशिश करेगी सरकार

    सरकार की ओर से भी इस बारे में साफ संकेत दिए गए हैं कि दो तिहाई बहुमत के आस-पास पहुंचने की स्थिति में परिसीमन बिल को पारित कराने की कोशिश की जाएगी।

    संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने शनिवार को एक्स पोस्ट पर सत्र की तारीखों का एलान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को मानसून सत्र 2026 के लिए बुलाने की मंजूरी दे दी है।

    खबरें और भी

    20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा और निर्णय लिए जाएंगे। मानसून सत्र परिसीमन बिल के संदर्भ में निर्णायक हो सकता है और कुछ दिन पहले रिजीजू ने भी इस संदर्भ में सरकार के आगे बढ़ाने के इरादे जाहिर किए थे।

    मालूम हो कि बीते अप्रैल में सरकार ने बजट सत्र का सत्रावसान नहीं कर बंगाल चुनाव के बीच महिला आरक्षण तथा परिसीमन बिल पारित कराने के लिए चार दिनों का सत्र बुलाया था। लेकिन लोकसभा में विपक्ष की एकजुटता के कारण परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन बिल को दो तिहाई समर्थन नहीं मिला और विधेयक गिर गया।

    क्या सरकार के पास सदन में पूर्ण बहुमत?

    पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी केवल हारी ही नहीं बल्कि उनके 28 में से 20 सांसद टूटकर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। शिवसेना यूबीटी के छह सांसद भी इसमें जुड़ गए हैं। इस तरह परिसीमन बिल के लिए भाजपा लोकसभा में विपक्षी खेमे के 26 सांसदों को अब तक तोड़ चुकी है।

    हालांकि यह आंकड़ा भी दो तिहाई के लिए पर्याप्त नहीं है और ऐसे में सरकार की नजरें द्रमुक तथा समाजवादी पार्टी पर है। संकेत हैं कि इस बार परिसीमन बिल में ही सरकार स्पष्ट रूप से सभी राज्यों में लोकसभा की सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव ला सकती है।

    हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव का आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू के अलावा सभी दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्री विरोध कर रहे हैं। मानसूत्र सत्र में ही टीएमसी के बागी सांसदों को अलग गुट के रूप में मान्यता का फैसला भी लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लिए जाने की संभावना है।

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