15 दिन में दूसरी बार मिलेंगे पीएम मोदी और पुतिन, ब्रिक्स से पहले रक्षा और व्यापार पर होगा फोकस
प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली में दूसरी बार द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। इस ...और पढ़ें

ब्रिक्स से पहले मोदी पुतिन की अहम मुलाकात रक्षा व्यापार पर जोर
HighLights
मोदी-पुतिन की ब्रिक्स से पहले दूसरी मुलाकात।
व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा मुख्य एजेंडा।
रूसी सेना में भारतीयों का मुद्दा उठेगा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक पखवाड़े में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात होने जा रही है। दोनों नेता हाल ही में बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे और इस सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने से पहले दोबारा मिलेंगे।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को भारतीय मीडिया से वर्चुअल संवाद में इसकी पुष्टि की।
उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं की इस मुलाकात में कारोबार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, दुर्लभ पृथ्वी प्रौद्योगिकी और पेट्रोलियम क्षेत्र में सहयोग सबसे अहम मुद्दे रहेंगे।
पेसकोव से रूस की सेना में भारतीय नागरिकों की भर्ती के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम इस बारे में सूचनाएं एकत्रित कर रहे हैं।
उधर, मंगलवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि, हमारी जानकारी के मुताबिक दो दर्जन भारतीय अभी भी रूसी सेना में कार्यरत हैं और हम रूस के साथ बात कर रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द छोड़ा जाए। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हाल ही में संसदीय समिति को बताया था कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक 51 भारतीयों की मौत हो चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति पुतिन के समक्ष प्रधानमंत्री मोदी रूसी सेना में भारतीयों की भर्ती का मामला उठा सकते हैं। जुलाई 2024 में जब मोदी मास्को की द्विपक्षीय यात्रा पर गए थे, तब उन्होंने पुतिन के सामने भी यह मुद्दा रखा था।
पेसकोव ने संकेत दिए कि राष्ट्रपति पुतिन 11 सितंबर को नई दिल्ली पहुंच सकते हैं और संभवतः उसी दिन दोनों नेताओं की द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है। यह दोनों नेताओं के बीच 20वीं द्विपक्षीय बैठक होगी।
बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई पिछली बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा था कि हमें अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना चाहिए।
पेसकोव ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बहुत मजबूत व्यक्तिगत संबंध हैं, जिसकी वजह से द्विपक्षीय मुद्दों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भी खुलकर और रचनात्मक बात हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत और रूस संयुक्त रूप से निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों को उन्नत करने और उनमें नई क्षमताएं जोड़ने पर विचार कर रहे हैं ताकि वे और अधिक प्रभावी तथा प्रतिस्पर्धी बन सकें। रक्षा सहयोग पुतिन की भारत यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
पेसकोव ने सैन्य-तकनीकी संबंधों को बहुत मजबूत बताया। उन्होंने कहा, “हम रक्षा क्षेत्र में संबंध सिर्फ खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि अब इससे आगे बढ़ चुके हैं।
ब्रह्मोस और अन्य हथियार प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब मिसाइलों में अतिरिक्त विशेषताएं जोड़कर उन्हें और प्रतिस्पर्धी बनाने का समय आ गया है। डी-डालराइजेशन यानी अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी डॉलर को कम करने के मुद्दे पर पेसकोव ने साफ किया कि रूस इसकी कोशिश नहीं कर रहा है और हर स्वीकार्य भुगतान पद्धति के लिए खुला है।
ब्रिक्स देशों के साथ रूस के 90 प्रतिशत लेन-देन अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहे हैं। भारत के साथ भी यही स्थिति है। कुछ देश अपनी राष्ट्रीय मुद्रा को राजनीतिक दबाव के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए रूस अपनी मुद्राओं का उपयोग कर रहा है।
यह डॉलर से छुटकारा पाने की नीति नहीं, बल्कि प्रतिबंधों के कारण व्यावहारिक जरूरत है।
