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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नोटों पर पाबंदी पर विपक्ष का मिला जुला रुख, नीतीश ने सराहा तो ममता ने की आलोचना

By Atul GuptaEdited By:
Updated: Wed, 09 Nov 2016 09:31 PM (IST)

चिदंबरम ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकार ने कालेधन पर अंकुश के लिए 1000 रुपए के नोट को बंद करने का फैसला किया है।

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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कालेधन पर कड़ा प्रहार करने के लिए 500 और 1000 रुपए के नोट का चलन तत्काल प्रभाव से बंद करने के मोदी सरकार के फैसले से कई विपक्षी दल भी अचंभे में है। विपक्षी पार्टियों के हतप्रभ होने का ही यह प्रमाण है कि एक तरफ कालेधन के खिलाफ सरकार के इस कदम का समर्थन कर रही हैं। तो दूसरी तरफ लोगों को इससे हो रही मुश्किलों के साथ इसकी सफलता को लेकर संदेह जता सरकार से सवाल भी कर रही हैं। हालांकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सैद्धांतिक रुप से कालेधन के खिलाफ सरकार के कदम का समर्थन किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि बेशक कालेधन को बाहर लाने के सरकार के उद्देश्य का पार्टी समर्थन करती है। मगर सरकार को अपने इस मकसद को कामयाब बनाने के क्रम में यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आम आदमी, गृहणियों, छात्रों से लेकर गरीबों और कारोबारियों को किसी तरह की दिक्कत न आए। साथ ही इनके पुराने नोटों को बिना फार्म भरने के झंझट से सीधे बैंकों के जरिए बदला जाए।

चिदंबरम ने जहां सरकार के कदम का कांग्रेस की ओर से समर्थन करने की बात कही। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के जरिए इस फैसले से लोगों को हो रही दिक्कतों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी ने गृहणियों, आम लोगों, व्यापारियों, श्रमिकों सबको भारी अफरा-तफरी के दौर में झोंकते हुए बता दिया है कि वे इनकी कितनी कम चिंता करते हैं। राहुल के सरकार पर इस प्रहार को क्या यह नहीं माना जाए कि कांग्रेस सरकार के नोटों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से सहमत नहीं है? इस पर चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस कालेधन के खिलाफ सरकार के कदमों का विरोध नहीं कर रही बल्कि हम इसके साथ हैं। कांग्रेस का केवल यही कहना है कि जिस तरह लोगों को दिक्कत हो रही है उसमें बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा जाए कि हर आम आदमी का पैसा नये करेंसी नोट से बिना अफरा-तफरी के तुंरत बदला जाए। क्योंकि हमारा मानना है कि 99 फीसद लोगों का पैसा उनकी मेहनत की कमाई है और इस फैसले से परेशानी भी उन्हीं को है।

चिदंबरम ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि सरकार ने कालेधन पर अंकुश के लिए 1000 रुपए के नोट को बंद करने का फैसला किया है। मगर इसकी जगह 2000 रुपए का नोट जारी किया जा रहा है जो समझ से परे है। उन्होंने सरकार से इस पहेली को सुलझाने के लिए कहा कि जब हजार रुपए के नोट से कालेधन की बाढ़ होती है तो फिर दो हजार के नोट से यह कैसे रुकेगी? उन्होंने कहा कि जनता पार्टी की सरकार ने भी 1978 में ऐसा ही किया था मगर तब यह स्कीम कामयाब नहीं हुई थी। सवालों के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि 15 लाख करोड रुपए पुराने नोटों के तौर पर प्रचलन में है। अगर इसमें सभी नोट बदल लिए जाते हैं तो फिर कालेधन को बाहर निकालने जैसी कोई बात नहीं होगी। इसलिए यह देखना दिचलस्प होगा कि कितने नोट बदलने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान भी ऐसे कदमों के बारे में सोचा गया मगर तब इसे आर्थिक रुप से फायदेमंद नहीं माना गया।

कालेधन को लेकर देश में बने जनमानस के मद्देनजर कांग्रेस ने जहां इसका समर्थन किया वहीं बिहार के मुख्यमंत्री जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने खुलकर नोटों पर पाबंदी के कदम को सही ठहराया। जबकि वामदलों ने सधे शब्दों में इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कालेधन पर प्रहार के लिए केवल इस तरह के कदमों से बात नहीं बनेगी। साथ ही इन दलों ने भी सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नोटों के प्रचलन बंद होने से मजूदरों, आम लोगों, छोटे दुकानदारों और गृहणियों को किसी तरह की दिक्कत न हो यह सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोटों पर पाबंदी के फैसले को तुगलकी बताते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

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