नदी जोड़ो योजना: 30 में से सिर्फ केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम जारी, राज्यसभा में जल शक्ति राज्य मंत्री ने दी जानकारी
सरकार ने बताया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना के तहत एकमात्र प्राथमिकता वाली नदी जोड़ो परियोजना है, जो कार्यान्वयन चरण में है। ...और पढ़ें

30 में से केवल केन-बेतवा लिंक परियोजना ही कार्यान्वयन में

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नई दिल्ली, पीटीआई : सरकार ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) राष्ट्रीय दृष्टिकोण योजना (एनपीपी) के तहत एकमात्र प्राथमिकता लिंक परियोजना है, जो कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुकी है, जबकि योजना के तहत 30 इंटरलिंकिंग आफ रिवर्स (आइएलआर) परियोजनाओं की पहचान की गई है।
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सोमवार को कहा कि सरकार ने जलाशय के अंतर्गत जल हस्तांतरण के लिए एनपीपी तैयार किया है।
इसके तहत 30 आइएलआर परियोजनाओं की पहचान की गई है, जिसमें 16 लिंक परियोजनाएं प्रायद्वीपीय घटक के अंतर्गत और 14 हिमालयी घटक के अंतर्गत हैं। मंत्री ने कहा, राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (एनडब्ल्यूडीए) को आइएलआर का कार्य सौंपा गया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी), जो एनपीपी के तहत एकमात्र प्राथमिकता लिंक परियोजना है, का अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है। यह परियोजना लगभग 11.88 लाख हेक्टेयर को सिंचाई, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति, 103 मेगावाट जल विद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।
इसके अलावा, गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा) लिंक को शामिल करनेवाली पोलावरम सिंचाई परियोजना (पीआइपी) को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में वर्गीकृत किया गया है और इसे आंध्र प्रदेश सरकार और पोलावरम परियोजना प्राधिकरण द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
यह परियोजना लगभग 7.2 लाख एकड़ को सिंचाई और गोदावरी और कृष्णा डेल्टा प्रणालियों में 23.5 लाख एकड़ का स्थिरीकरण करने का लक्ष्य रखती है, जिसमें कृष्णा बेसिन में 80 टीएमसी गोदावरी जल का मोड़ना, पेयजल और औद्योगिक जल आपूर्ति और 960 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन शामिल है।
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हिमालयी घटक के तहत, सरदा-यमुना लिंक की डीपीआर पूरी हो चुकी है, जबकि कोसी-घाघरा, गंडक-गंगा और घाघरा-यमुना लिंक की व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी हो चुकी हैं। कोसी-मेची अंतर-राज्य लिंक की पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट पूरी हो चुकी है और प्रस्ताव को हटा दिया गया है।
जल संरक्षण में 1.41 लाख कार्यों का सफलतापूर्वक निष्पादन
चौधरी ने बताया कि 'जल संचय जन भागीदारी : कैच द रेन 2026 पहल के तहत 6 अगस्त तक 1.41 लाख से अधिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं, जिसमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ ने मिलकर 1.25 लाख कार्यों का योगदान दिया है।
छह अगस्त तक राज्यवार प्रगति के अनुसार, राजस्थान ने 63,470 कार्य पूरे किए हैं और छत्तीसगढ़ ने 61,450, इसके बाद हिमाचल प्रदेश (3,591), पंजाब (2,933), तेलंगाना (2,735), गुजरात (1,707) और जम्मू-कश्मीर (1,483) का स्थान है।
भूजल निकासी का स्तर 60.63 प्रतिशत
जल शक्ति मंत्री सीआर पटिल ने बताया कि डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्सेज असेसमेंट, 2025 के अनुसार, देश का कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 449 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है। देश में भूजल निकासी का स्तर 60.63 प्रतिशत है।
भूजल निकासी का स्तर 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जैसे पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पुडुचेरी, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ व कर्नाटक। असेसमेंट परिणामों के जिला-वार संग्रह में 281 जिलों में भूजल निकासी का स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।